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आधी आबादी की आवाज़ कैसे रहे बुलंद…जसम ने किया विमर्श

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० अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जन संस्कृति मंच का आयोजन

रायपुर। देश और दुनिया में आधी आबादी की स्थिति कितनी खराब है…यह बात किसी से छिपी हुई नहीं है. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आयोजित एक आयोजन में जन संस्कृति मंच की महिला साथियों ने यह माना कि स्त्रियों को अपनी स्थिति को बेहतर बनाने और अपना अधिकार हासिल करने के एकजुट होकर संघर्ष तेज करना होगा.

जसम से जुड़ी लेखिकाओं और संस्कृतिकर्मियों ने यह संकल्प लिया कि दुनिया में जहां कहीं भी स्त्रियों और बच्चियों के साथ अन्याय-अत्याचार होगा उसके खिलाफ आवाज़ उठायी जाएगी और लेखन-सृजन के जरिए प्रतिरोध दर्ज किया जाएगा. लेखिकाओं ने माना कि यह समय खाली बैठने का समय नहीं है.आधी आबादी को निरन्तर बोलना होगा.कदम से कदम मिलाना होगा.आवाज़ से आवाज़ मिलानी होगी.

प्राध्यापक अजय शुक्ला के विशाल नगर स्थित आवास पर आयोजित जसम के आयोजन में लेखिकाओं ने घर-परिवार के अलावा राजनीति में स्त्रियों की हैसियत, फिल्मों में स्त्रियों की स्थिति को लेकर खास चर्चा की.

लेखिकाओं ने देश-दुनिया को झकझोर देने वाली एप्सटीन फाइल और उसमें शामिल रसूखदार नेताओं के कारनामों को घृणित और शर्मनाक बताया. लेखिकाओं ने कहा कि अब पूरी दुनिया में स्त्रियों की सुरक्षा एक अहम मसला है. जिस देश और जगह पर स्त्रियां और बच्चियां खुद को आज़ाद और सुरक्षित महसूस नहीं करती, उस देश का बरबाद होना तय है.

इस मौके पर जसम रायपुर से जुड़ी नामचीन कवियित्री डॉ.वंदना कुमार, सनियारा खान, नीलिमा मिश्रा, रुपेंद्र तिवारी और सर्वज्ञ नायर ने धारदार कविताओं का पाठ किया.गायिका वर्षा बोपचे, सुनीता शुक्ला और समीक्षा नायर ने जनगीतों की शानदार प्रस्तुति दी. सुहानी शर्मा ने फिल्मों में स्त्री लेखन के महत्व को रेखांकित किया. कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. पूनम संजू ने किया.

जसम के इस आयोजन में जनवादी लेखक संघ के प्रदेश सचिव पीसी रथ, जसम के वरिष्ठ सदस्य समीर दीवान, राजकुमार सोनी, अजय शुक्ला सहित अनेक प्रबुद्धजन उपस्थित थे.