गृह मंत्री विजय शर्मा ने विधानसभा में पेश किया धर्म स्वातंत्र्य संशोधन विधेयक , कांग्रेस ने उठाई आपत्ति, समिति को भेजने की मांग

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य संशोधन विधेयक 2026 पेश कर दिया गया है। यह विधेयक उप-मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा द्वारा सदन के पटल पर रखा गया। हालांकि, इस बिल को लेकर विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि देश के कई राज्यों में इसी तरह के कानून लंबित हैं, ऐसे में जल्दबाजी में इस पर चर्चा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि इस विधेयक को पहले विधानसभा की प्रवर समिति को भेजा जाए, ताकि विस्तार से समीक्षा हो सके।
SIR मुद्दे पर भी हंगामा
इससे पहले शून्यकाल में विपक्ष ने SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर स्थगन प्रस्ताव पेश किया। डॉ महंत ने दावा किया कि प्रदेश में 19 लाख से अधिक लोग “लापता” हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ये लोग कहां गए और सरकार इस पर गंभीर क्यों नहीं है। साथ ही बस्तर क्षेत्र में सलवा जुडूम के दौरान कथित रूप से लापता लोगों का मुद्दा भी उठाया गया।
क्या है धर्म स्वातंत्र्य संशोधन विधेयक 2026?
यह एक प्रस्तावित कानून है, जिसका उद्देश्य राज्य में जबरन या अवैध धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है। सरकार का कहना है कि यह कानून नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए लाया गया है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
जबरदस्ती, लालच, धोखे या दबाव से धर्म परिवर्तन कराना अपराध माना जाएगा
स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने पर पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देना अनिवार्य होगा
सामान्य मामलों में 7 से 10 साल तक की सजा
महिलाओं, नाबालिगों और SC/ST वर्ग के मामलों में 10 से 20 साल तक की सजा
सामूहिक धर्म परिवर्तन पर आजीवन कारावास का प्रावधान
अपराध को संज्ञेय और गैर-जमानती बनाया गया है
क्यों अहम है यह मुद्दा?
यह विधेयक राज्य की राजनीति और सामाजिक माहौल पर बड़ा असर डाल सकता है। एक ओर सरकार इसे धार्मिक स्वतंत्रता की सुरक्षा बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लेकर सवाल उठा रहा है और विस्तृत चर्चा की मांग कर रहा है।





