#संपादकीय

कही-सुनी (29 MARCH-26) : मई में साय मंत्रिमंडल में व्यापक फेरबदल के संकेत

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रवि भोई की कलम से

चर्चा है कि पांच राज्यों के चुनाव के बाद छत्तीसगढ़ के विष्णुदेव साय मंत्रिमडल में व्यापक फेरबदल के आसार हैं। राज्य के कई मंत्रियों को लेकर लोगों की राय अच्छी नहीं बताई जा रही है। बताते हैं एक मंत्री जी ब्यूरोक्रेसी पर पकड़ बनाकर प्रशासन को अपने मन-मुताबिक हाँक रहे हैं। इससे कुछ मंत्री दुखी हैं, क्योंकि अफसर उनकी सुन नहीं रहे हैं। इसी वजह से कई मंत्रियों का अपने विभागीय सचिव से तालमेल बिगड़ा हुआ है। हल्ला है कि आरएसएस के अंदरूनी सर्वे में कई मंत्रियों के अगले चुनाव में जीत पाने की संभावना नजर नहीं आ रही है। खबर है कि ख़ुफ़िया रिपोर्टों में भी कई मंत्रियों की हालत पतली बताई गई है। कई मंत्री ऐसे भी हैं,जो विधानसभा के भीतर न तो सवालों का ठीक से जवाब दे पाए और न ही विपक्ष पर हावी हो पाए। मंत्रियों की कार्यशैली और व्यवहार को लेकर भाजपा के नेता और कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी दिखती है। भाजपा के लोग ही चुटकी लेने लगे हैं, हमारी सरकार में ऐसे जनप्रतिनिधियों के मंत्री बन जाने की संभावना नहीं थी। माना जा रहा है कि सभी मंत्रियों का इस्तीफा लेकर नए सिरे से मंत्रिमंडल का पुनर्गठन किया जा सकता है। खबर है कि एक मंत्री को केंद्रीय संगठन में भी भेजा जा सकता है।

महकमे के लिए दाग बन गए डांगी

2003 बैच के आईपीएस रतनलाल डांगी पुलिस महकमे के लिए दाग बन गए। सोशल मीडिया में आपत्तिजनक फोटो और अन्य आरोपों के आधार पर रतनलाल डांगी को निलंबित कर दिया गया है। रतनलाल डांगी राज्य में कई जिलों में एसपी और बड़े रेंज में आईजी रहे हैं। पुलिस महकमे में ऊँचे पद पर बैठे लोगों के कृत्य ही कदाचरण के दायरे में आए तो साफ़ है कि विभाग में किस तरह की अराजकता है। राज्य का पुलिस विभाग एडहॉक पर चल रहा है। एक साल से अधिक समय हो गया सरकार स्थायी डीजीपी ही नियुक्त नहीं कर पाई है। बताते हैं कामचलाऊ डीजीपी अरुणदेव गौतम ने राज्य सरकार की अनुमति के बगैर ही रतनलाल डांगी को नवंबर 2025 में पुलिस मुख्यालय में नारकोटिक्स का प्रभारी बना दिया,जबकि सरकार ने एक महिला की शिकायत के आधार पर सरकार ने श्री डांगी को राज्य पुलिस प्रशिक्षण अकादमी के निदेशक के पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय में अटैच कर दिया था। प्रभारी डीजीपी अरुणदेव गौतम की श्री डांगी के प्रति मेहरबानी चर्चा में है। कहा जा रहा है कि प्रभारी डीजीपी ने श्री डांगी के खिलाफ एक्शन लेने में देरी की। रतनलाल डांगी के खिलाफ शिकायतों की जाँच के लिए डीजीपी ने दो सदस्यीय समिति बनाई थी, समिति ने काफी पहले ही रिपोर्ट दे दी थी।

ब्यूरोक्रेसी में फेरबदल टला

कहते हैं छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक फेरबदल फिलहाल टल गया है। पहले चर्चा थी कि विधानसभा का बजट सत्र समाप्त होने के बाद राज्य में व्यापक स्तर पर प्रशासनिक बदलाव होगा, लेकिन पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में राज्य के कई आईएएस और अन्य सेवाओं के अफसरों की ड्यूटी के कारण प्रशासनिक फेरबदल टलने की खबर है। अब माना जा रहा है कि मई के दूसरे हफ्ते में प्रशासनिक फेरबदल होगा। सरकार ने 2012 बैच के आईएएस रजत बंसल को पुरानी जिम्मेदारियों के साथ आयुक्त जनसंपर्क और मुख्यमंत्री सचिवालय का प्रभार सौंपकर तात्कालिक व्यवस्था कर दी है। जनसंपर्क आयुक्त डॉ रवि मित्तल के पीएमओ में जाने के कारण उन्हें कार्यमुक्त करना और वहां नई पोस्टिंग करना जरुरी थी। कहा जा रहा है कि प्रशासनिक फेरबदल की तैयारियां हो गई थी, पर कई अफसरों के न होने और उनके लिंक अफसर की व्यवस्था जैसी दिक्कतों के कारण पेंच फंस गया और मामला टल गया। कई अफसर राज्य में साय सरकार आने के बाद से एक ही विभाग में कार्यरत हैं। कुछ जिलों में भी यही स्थिति है। फील्ड और दूसरे विभागों में जाने के इच्छुक अफसरों को अब कुछ दिन और इंतजार करना पड़ सकता है।

सागर की लहर बने कांग्रेसी नेता

कहते हैं कांग्रेस के एक नेता सागर की लहरों की तरह फिर से सत्ता में वापसी का तेवर दिखा रहे हैं और अफसरों को ताकीद भी कर रहे हैं। कांग्रेस के नेताजी काफी एक्टिव हो गए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत से भी तेज दौड़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ विधानसभा के चुनाव में अभी ढाई-पौने तीन साल बचे हैं, पर कांग्रेस नेता के तेवर से ब्यूरोक्रेट भी तेल की धार को समझने में लग गए हैं। प्रशासनिक हलकों में कांग्रेस के नेतृत्व पर अभी से चर्चा होने लगी है। अब देखते हैं समय क्या करवट लेता है। साल 2008 में डॉ रमन सिंह की वापसी न होने की संभावना पर एक वरिष्ठ आईएएस नतीजों से पहले पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी से मिलने चले गए थे , जबकि वे रमनसिंह की सरकार में बड़े पावरफुल पोस्ट पर थे। 2008 में रमनसिंह दोबारा मुख्यमंत्री बने तो जोगी जी से मिलने गए आईएएस महोदय के पर कतरे गए थे।

रायगढ़ यूनिवर्सिटी का कुलपति कौन बनेगा ?

कहते हैं स्व. नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय रायगढ़ का कुलपति छत्तीसगढ़ का निवासी बनेगा या दूसरे राज्य का, इस पर विवाद शुरू हो गया है। स्व. नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय रायगढ़ के कुलपति के लिए पैनल कई महीनों से राज्यपाल के पास पहुँच गया है। अब राज्यपाल रमेन डेका को पैनल में कुलपति के लिए एक व्यक्ति का चयन करना है। इस विश्वविद्यालय के लिए छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों में कार्यरत प्रोफेसरों के साथ अन्य राज्यों के प्रोफेसरों ने आवेदन किया है। बताते हैं कुलपति के लिए पैनल में छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के प्रोफेसरों का नाम है। चर्चा है कि पैनल में शामिल एक पहाड़ी राज्य के प्रोफ़ेसर के नाम को लेकर विवाद शुरू हो गया है। खबर है कि पहाड़ी राज्य के प्रोफ़ेसर को कुलपति बनाने के शीर्ष स्तर पर दबाव बनाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के कई विश्वविद्यालयों में अन्य राज्यों के प्रोफ़ेसर कुलपति के पद पर कार्यरत हैं। इस कारण नियुक्ति से पहले ही मोर्चाबंदी की जा रही है।

(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
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