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54 साल बाद चांद की ओर इंसान: नासा का आर्टेमिस-II मिशन रचेगा नया इतिहास

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इंटरनेशनल न्यूज़ । अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा एक बार फिर चंद्रमा पर इंसानों को भेजने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत तैयार किया गया आर्टेमिस-II मिशन करीब 54 साल बाद इंसानों को चांद के करीब ले जाएगा। यह मिशन न केवल तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य में चांद पर स्थायी बेस बनाने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगा।

 

आर्टेमिस-II नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम का दूसरा मिशन है। इससे पहले आर्टेमिस-I को 2022 में बिना इंसानों के भेजा गया था, जिसका उद्देश्य रॉकेट और अंतरिक्ष यान की क्षमता का परीक्षण करना था। अब आर्टेमिस-II के जरिए चार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के पास भेजा जाएगा।

यह मिशन लगभग 10 दिनों का होगा और इसमें स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट और ओरायन स्पेसक्राफ्ट का उपयोग किया जाएगा। अंतरिक्ष यात्री चांद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे, लेकिन उसकी सतह पर नहीं उतरेंगे। मिशन के दौरान यान चंद्रमा के पीछे से गुजरते हुए उसके गुरुत्वाकर्षण की मदद से पृथ्वी पर वापस लौट आएगा।

इस ऐतिहासिक मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं—रीड वाइसमैन (कमांडर), विक्टर ग्लोवर (पायलट), क्रिस्टीना कोच (मिशन विशेषज्ञ) और जेरेमी हैनसेन (मिशन विशेषज्ञ)। यह पहली बार होगा जब कोई महिला, अश्वेत अंतरिक्ष यात्री और कनाडाई नागरिक पृथ्वी की निचली कक्षा से बाहर जाएंगे।

आर्टेमिस-II का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष में मानव सुरक्षा से जुड़ी तकनीकों का परीक्षण करना, लाइफ सपोर्ट सिस्टम की जांच करना और भविष्य के चंद्र मिशनों की तैयारी करना है। इस मिशन के सफल होने के बाद आर्टेमिस-III के तहत इंसानों को चांद की सतह पर उतारने की योजना है।

नासा इस मिशन को अप्रैल 2026 में लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो यह मिशन अंतरिक्ष इतिहास में एक नई उपलब्धि जोड़ देगा और इंसानों के चांद पर स्थायी ठिकाना बनाने के सपने को और मजबूत करेगा।

क्या है आर्टेमिस-II मिशन?
यह Artemis Program का दूसरा मिशन है
1972 के Apollo 17 के बाद पहली बार इंसानों को चांद के पास भेजा जाएगा
मिशन की अवधि: लगभग 10 दिन
इसमें इस्तेमाल होगा:
Space Launch System (SLS)
Orion spacecraft

खास बात: यह लैंडिंग मिशन नहीं है, बल्कि चांद के चारों ओर घूमकर वापस आने वाला मिशन है।

कौन-कौन जा रहे हैं?

मिशन का क्रू इतिहास रचेगा:

Reid Wiseman – कमांडर
Victor Glover – पायलट (पहले अश्वेत व्यक्ति जो चंद्रमा के पास जाएंगे)
Christina Koch – मिशन स्पेशलिस्ट (रिकॉर्ड होल्डर)
Jeremy Hansen – मिशन स्पेशलिस्ट (पहले कनाडाई जो चांद के पास जाएंगे)

यह पहली बार होगा जब:

कोई महिला
कोई अश्वेत अंतरिक्ष यात्री
और कोई कनाडाई
पृथ्वी की निचली कक्षा से बाहर जाएंगे
मिशन कैसे काम करेगा?
यह Free-return trajectory का उपयोग करेगा

यानी:
यान चांद के पीछे से घूमेगा
और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण की मदद से खुद ही पृथ्वी की ओर लौट आएगा
यात्री चांद के उस हिस्से को भी देखेंगे जो पृथ्वी से दिखाई नहीं देता
संभव है कि यह मिशन दूरी का नया रिकॉर्ड बनाए (Apollo 13 से भी आगे)

लॉन्च कब होगा?
लक्ष्य: अप्रैल 2026
संभावित लॉन्च: 1 अप्रैल (बैकअप: 3–6 अप्रैल, 30 अप्रैल)
स्थान: Kennedy Space Center

(भारत में लॉन्च का समय अगली सुबह दिखेगा)

मिशन का असली उद्देश्य क्या है?

आर्टेमिस-II का मकसद सिर्फ चांद घूमना नहीं है, बल्कि:

मानव-सुरक्षित अंतरिक्ष यात्रा सिस्टम का परीक्षण
लाइफ-सपोर्ट सिस्टम की जांच
भविष्य के चंद्र लैंडिंग मिशनों की तैयारी

इसके बाद:

Artemis III में इंसानों को चांद पर उतारने की योजना है
और आगे चलकर चांद पर स्थायी बेस बनाने का लक्ष्य है