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अक्षय तृतीया 2026: 19 या 20 अप्रैल? जानिए सही तिथि और दान का महत्व

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धर्म डेस्क।हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व माना जाता है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व शुभ कार्यों, दान-पुण्य और नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है, यानी इस दिन बिना मुहूर्त देखे कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है।

इस वर्ष अक्षय तृतीया की तिथि को लेकर 19 और 20 अप्रैल के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि तृतीया तिथि दोनों दिन पड़ रही है।

कब है अक्षय तृतीया 2026?

पंचांग के अनुसार:

तृतीया तिथि प्रारंभ: 19 अप्रैल, सुबह 10:50 बजे
तृतीया तिथि समाप्त: 20 अप्रैल, सुबह 7:20 बजे

उदयातिथि और शास्त्रों के नियमों के अनुसार, अक्षय तृतीया 19 अप्रैल 2026, रविवार को मनाना ही उचित और शास्त्र सम्मत माना गया है।

क्यों है कंफ्यूजन?

इस बार तृतीया तिथि 19 और 20 अप्रैल दोनों दिन पूर्वाह्न काल में आंशिक रूप से पड़ रही है। लेकिन 20 अप्रैल को यह तिथि तीन मुहूर्त से कम समय के लिए है, जबकि 19 अप्रैल को यह पूर्वाह्न, मध्याह्न और अपराह्न तक व्याप्त रहती है।
इसी आधार पर शास्त्रों में 19 अप्रैल को पर्व मनाने का निर्देश दिया गया है।

क्या कहता है शास्त्र?

पद्म पुराण के अनुसार, जिस दिन तृतीया तिथि पूर्वाह्न में विद्यमान हो, उसी दिन अक्षय तृतीया मनानी चाहिए। यदि तिथि दोनों दिन हो, तो जिस दिन वह तीन मुहूर्त तक व्याप्त हो, वही दिन मान्य होता है।

अक्षय तृतीया का महत्व

इस दिन किए गए स्नान, दान, जप और पितृकर्म का फल अक्षय (अनंत) माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन से सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ हुआ था, इसलिए इसे युगादि तिथि भी कहा जाता है।

बिना मुहूर्त के शुभ कार्य किए जा सकते हैं
सोना खरीदना, विवाह, गृह प्रवेश के लिए शुभ दिन
जरूरतमंदों को दान करने से विशेष पुण्य मिलता है

अक्षय तृतीया को आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है।