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अबूझमाड़ में महुआ प्रसंस्करण के लिए बनेगा जनजातीय सहकारी मॉडल, संग्राहकों को मिलेगा सीधा ऑनलाइन भुगतान

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रायपुर। रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी लघु वनोपज संघ की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में अबूझमाड़ क्षेत्र के जनजातीय विकास और महुआ प्रसंस्करण को लेकर बड़े निर्णयों पर चर्चा की गई। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में मंत्रालय (महानदी भवन) में हुई इस बैठक में आदिवासी नेतृत्व में महुआ प्रसंस्करण के लिए सहकारी मॉडल विकसित करने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में बताया गया कि वन धन योजना और TRIFED के सहयोग से महुआ प्रसंस्करण केंद्र स्थापित करने की कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है, जिससे आदिवासी समुदाय की आय में वृद्धि हो सके।

अधिकारियों के अनुसार, वन धन सहकारी समितियों द्वारा महुआ के फूलों से कई मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें महुआ लड्डू, कुकीज, महुआ स्क्वैश (शरबत) और अचार शामिल हैं। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर उत्पादन इकाइयों को बढ़ावा देकर महुआ प्रसंस्करण को बड़े पैमाने पर विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य की भी समीक्षा की गई। इस दौरान संग्राहकों के हितों की सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में संग्राहकों को सीधे उनके बैंक खातों में ऑनलाइन भुगतान किया जा रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुरक्षित बनी हुई है।

इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य सचिव विकासशील के साथ-साथ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, गृह विभाग की सचिव श्रीमती नेहा चंपावत, तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) श्रीनिवास राव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।