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बेजुबानों की जान से खिलवाड़? छत्तीसगढ़ के नसबंदी अभियान पर उठे गंभीर सवाल, ऑपरेशन के बाद मौतों और अनियमितताओं के आरोप

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में आवारा कुत्तों की नसबंदी एवं रेबीज टीकाकरण अभियान को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। पशु प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पशु कल्याण और रेबीज नियंत्रण के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान में कई स्थानों पर नियमों की अनदेखी की जा रही है, जिसके चलते ऑपरेशन के बाद कुत्तों की मौत, लापरवाही और अनियमितताओं के मामले सामने आ रहे हैं।

 

नसबंदी के बाद मौतों से बढ़ी चिंता

 

पशु प्रेमियों के अनुसार, रायपुर के सोंडोंगरी स्थित नसबंदी केंद्र में ऑपरेशन के बाद एक कुत्ते की मौत हो गई। आरोप है कि मामले को छिपाने का प्रयास किया गया, जिसके बाद पशु प्रेमियों ने पोस्टमार्टम कराया। इसके अलावा रायपुर और बिलासपुर से भी नसबंदी के बाद कुत्तों की मौत की शिकायतें सामने आई हैं।

 

1000 रेबीज वैक्सीन खराब मिलने का दावा

 

बिरगांव नगर निगम क्षेत्र में अभियान के दौरान उपयोग के लिए रखे गए लगभग 1000 रेबीज टीके खराब पाए जाने का भी दावा किया गया है। इसे लेकर अभियान की गुणवत्ता और पशुओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

 

ABC Rules के उल्लंघन के आरोप

 

पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि Animal Birth Control (ABC) Rules के कई प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा है। नियमों के अनुसार—

 

० केवल मान्यता प्राप्त संस्था ही अभियान संचालित कर सकती है।

० 6 माह से कम उम्र के कुत्तों की नसबंदी नहीं की जा सकती।

० गर्भवती मादा कुत्तों की नसबंदी प्रतिबंधित है।

० कुत्तों को उनके मूल क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में नहीं छोड़ा जा सकता।

० अनुभवी पशु चिकित्सकों की निगरानी अनिवार्य है।

० बीमार और स्वस्थ पशुओं को अलग रखा जाना चाहिए।

० स्वतंत्र मॉनिटरिंग समिति का गठन होना चाहिए।

 

लगातार मिल रही हैं शिकायतें

 

पशु प्रेमियों ने आरोप लगाया है कि अभियान के दौरान—

 

० कुत्तों को उनके मूल क्षेत्र से हटाकर अन्य स्थानों पर छोड़ा जा रहा है।

० लंबे समय तक छोटे पिंजरों में रखा जा रहा है।

० घायल और बीमार पशुओं की उचित देखभाल नहीं हो रही।

० रिकॉर्ड और GPS लोकेशन में भी कथित अनियमितताएं सामने आई हैं।

 

इन मामलों की शिकायतें नगर निगम और नगरीय प्रशासन विभाग को कई बार भेजे जाने का दावा किया गया है।

 

टेंडर प्राप्त संस्था पर भी सवाल

 

जानकारी के अनुसार, प्रदेश में नसबंदी अभियान का कार्य स्नेह एनिमल वेलफेयर फाउंडेशन को सौंपा गया है। पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि जयपुर नगर निगम ने कुत्तों के कथित स्थानांतरण और GPS डेटा में गड़बड़ी के आरोपों के चलते इस संस्था का टेंडर निरस्त किया था।

 

प्रत्येक कुत्ते पर ₹1640 खर्च

 

राज्य सरकार इस अभियान के तहत प्रत्येक कुत्ते की नसबंदी पर लगभग 1,640 रुपये खर्च कर रही है। ऐसे में अभियान की गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग तेज हो गई है।

 

पशु प्रेमियों की प्रतिक्रिया

 

कस्तूरी बल्लाल (पशु प्रेमी) ने कहा, “हम नसबंदी कार्यक्रम के विरोध में नहीं हैं। यह जरूरी है, लेकिन किसी भी कीमत पर पशुओं के साथ क्रूरता स्वीकार नहीं की जा सकती।”

 

डॉ. किरण आहूजा (पशु अधिकार कार्यकर्ता) ने कहा, “RTI के माध्यम से मांगी गई महत्वपूर्ण जानकारियां निर्धारित समय सीमा के बाद भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।”

 

मुख्य मांगें

० सभी नसबंदी केंद्रों का स्वतंत्र निरीक्षण कराया जाए।

० मौत और लापरवाही के मामलों की निष्पक्ष जांच हो।

० मॉनिटरिंग समिति का तत्काल गठन किया जाए।

० ABC Rules का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

० दोषी पाए जाने पर संबंधित एजेंसी और अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

० पशुओं के साथ मानवीय और संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।