CG विधानसभा में बाघों के शिकार पर गरमाई बहस, विपक्ष ने वन मंत्री को घेरा; सरकार बोली- दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

० इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत और तस्करी का मामला सदन में गूंजा, मंत्री बोले- 41 आरोपी गिरफ्तार, लापरवाह अफसर निलंबित
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार और तस्करी का मामला जोरदार तरीके से उठा। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कांग्रेस विधायकों शेषराज हरवंश, विक्रम मंडावी और लखेश्वर बघेल ने भी सरकार को घेरते हुए वन्यजीव संरक्षण में लापरवाही का आरोप लगाया।
महंत ने पूछा- गिरफ्तार आईबी जवान का नाम क्यों छिपाया?
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि इंद्रावती टाइगर रिजर्व में लगातार बाघों का शिकार हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि मामले में गिरफ्तार महाराष्ट्र पुलिस के इंटेलिजेंस सेल (आईबी) से जुड़े जवान का नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक संरक्षण या सिंडिकेट है?
महंत ने कहा कि सरकार स्वयं स्वीकार कर रही है कि पिछले 30 महीनों में 6 बाघों की मौत हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि बाघों की तस्करी हो रही है और निगरानी व्यवस्था भी कमजोर साबित हुई है।
वन मंत्री का जवाब- किसी को बचाने की कोशिश नहीं
वन मंत्री केदार कश्यप ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी आरोपी को बचाने की कोशिश नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण के लिए विभाग पूरी तरह सक्रिय है और कैमरा निगरानी व्यवस्था भी सुचारु रूप से काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि इंद्रावती टाइगर रिजर्व में 126 कैमरे लगाए गए हैं और उनके बंद होने जैसी कोई स्थिति नहीं थी।
2022 के आंकड़ों में 5 बाघों की पुष्टि
विधायक विक्रम मंडावी के सवाल पर वन मंत्री ने बताया कि वर्ष 2022 की गणना के अनुसार इंद्रावती टाइगर रिजर्व में 5 बाघों की मौजूदगी की पुष्टि हुई थी। वहीं अब तक 6 बाघों की खाल बरामद हुई हैं, हालांकि यह वैज्ञानिक रूप से अभी प्रमाणित नहीं हुआ है कि सभी खालें इंद्रावती के ही बाघों की हैं। रिजर्व के संरक्षण पर हर साल करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं।
महाराष्ट्र पुलिसकर्मी समेत तस्कर गिरफ्तार
वन मंत्री ने सदन को बताया कि 29 जून 2026 को मिली सूचना के आधार पर छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर संयुक्त अभियान चलाया गया। कार्रवाई के दौरान दो आरोपियों के कब्जे से दो बाघों की खाल, 13 मूंछें और एक मोटरसाइकिल बरामद की गई।
गिरफ्तार आरोपियों में बियेश्वर गेड़ाम, जो महाराष्ट्र पुलिस के इंटेलिजेंस सेल में सिपाही है, और बाबूराव मडावी, जो पुलिस का गोपनीय मुखबिर था, शामिल हैं। घटना के बाद बियेश्वर गेड़ाम को निलंबित कर दिया गया, जबकि बाबूराव मडावी को सेवा से अलग कर दिया गया।
तीसरी खाल भी बरामद, 41 आरोपी गिरफ्तार
वन मंत्री ने बताया कि पूछताछ के बाद छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर नेतीवाड़ा गांव में व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया। इस दौरान शिकार में इस्तेमाल होने वाले फंदे, चाकू, 12 नाखून, 4 कैनाइन दांत और एक अन्य बाघ की खाल बरामद की गई।
उन्होंने बताया कि अब तक बाघों के अवैध शिकार और तस्करी के 5 मामलों में 41 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मामले की वैज्ञानिक जांच के लिए डीएनए सैंपल भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून भेजे गए हैं।
तीन वनकर्मी निलंबित
वन मंत्री ने बताया कि इस मामले में लापरवाही बरतने पर पासेवाड़ा रेंज के परिक्षेत्र अधिकारी कमल सिंह कश्यप, उपवनक्षेत्रपाल नरहरी सिंह बघेल और वनरक्षक विश्वनाथ मांझी को निलंबित कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बाघ संरक्षण के लिए छत्तीसगढ़ टाइगर फाउंडेशन सोसायटी का गठन किया है और वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के निर्देशों का सख्ती से पालन किया जा रहा है। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि वन्यजीवों के शिकार और तस्करी में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।


