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विधानसभा में मछुआ नीति पर गरमाई बहस, चरणदास महंत ने उठाए सवाल; मंत्री बोले- नई नीति में दूर होंगी विसंगतियां

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रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन गुरुवार को मछुआ नीति को लेकर सदन में जोरदार चर्चा हुई। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मौजूदा नीति की विसंगतियों पर सवाल उठाए, जिस पर सरकार ने नई नीति तैयार करने और सभी खामियों को दूर करने का भरोसा दिया।

वन क्षेत्र के तालाबों में टैक्स पर उठे सवाल

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि वन क्षेत्र के तालाबों में आदिवासियों से टैक्स नहीं लिया जा सकता, लेकिन मौजूदा मछुआ नीति में टैक्स का प्रावधान किया गया है। उन्होंने इसे आदिवासी हितों के खिलाफ बताते हुए सरकार से नीति में सुधार की मांग की।

अजय चंद्राकर ने भूपेश सरकार पर साधा निशाना

चर्चा के दौरान वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि वर्तमान मछुआ नीति वर्ष 2022 में तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के दौरान बनाई गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि नीति में 10 हजार हेक्टेयर तक के जलाशयों का ठेका पंजीकृत व्यक्ति या संस्था को देने का प्रावधान किया गया, जिससे स्थानीय मछुआरों और समुदाय के अधिकार प्रभावित हुए।

उन्होंने सरकार से नई नीति में इन सभी विसंगतियों को दूर करने की मांग की।

मंत्री रामविचार नेताम का आश्वासन

मत्स्य पालन मंत्री रामविचार नेताम ने सदन में कहा कि सरकार नई मछुआ नीति पर काम कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नई नीति में मौजूदा सभी विसंगतियों को दूर किया जाएगा और स्थानीय समुदायों तथा पारंपरिक मछुआरों के हितों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।

मंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकार नीति में आवश्यक बदलाव करेगी ताकि मछुआरों को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत व्यवस्था का लाभ मिल सके।