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वेदांता एल्युमीनियम ने अगली पीढ़ी की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए एआई-आधारित तकनीकें अपनाईं

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रायपुर। भारत में मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में नई तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। डिजिटल तकनीकें काम को सुरक्षित बनाने, बेहतर तरीके से काम करने और संचालन को मजबूत बनाने में मदद कर रही हैं। इसी दिशा में, भारत की सबसे बड़ी एल्युमीनियम निर्माता वेदांता एल्युमीनियम अपने कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), इंडस्ट्रियल इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईआईओटी), एडवांस्ड एनालिटिक्स और स्मार्ट सेफ्टी सिस्टम का इस्तेमाल कर रही है। इन तकनीकों की मदद से कंपनी मैन्युफैक्चरिंग में आधुनिक और आपस में जुड़ी हुई तकनीक-आधारित व्यवस्था को बढ़ावा दे रही है।

जैसे-जैसे कंपनियां तेजी से बदलते कारोबारी माहौल में अपनी प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं, डिजिटल तकनीकें प्लांट को चलाने, जोखिम कम करने और सही फैसले लेने का अहम हिस्सा बन रही हैं। इन तकनीकों से कामकाज की बेहतर जानकारी मिलती है और रियल टाइम में जरूरी जानकारी और सुझाव मिलते हैं। इससे उद्योगों को सुरक्षा, भरोसेमंद कामकाज और दक्षता बेहतर करने में मदद मिल रही है। वेदांता एल्युमीनियम में यह डिजिटल बदलाव लॉजिस्टिक्स, उत्पादन, मशीनों और उपकरणों के प्रबंधन तथा कर्मचारियों की सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर सुधार ला रहा है।

बाल्को के छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित प्रमुख स्मेल्टर प्लांट में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से कंपनी की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था की बेहतर निगरानी और समझ संभव हो रही है। प्लांट में लगाए गए एआई आधारित चार कंट्रोल टावर जीपीएस, आईओटी आधारित वाहन ट्रैकिंग, वाहनों की निगरानी के लिए वीडियो टेलीमैटिक्स, जियो-फेंसिंग और रियल-टाइम एनालिटिक्स को एक साथ जोड़ते हैं। इनकी मदद से कोयले की लॉजिस्टिक्स, तैयार उत्पादों की डिलीवरी और राख के प्रबंधन पर नजर रखी जाती है।

लांजीगढ़ में, डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और कर्मचारियों को बेहतर तरीके से तैयार करने के लिए किया जा रहा है। रिफाइनरी में ‘एल्युमिनाटी’ नाम का एआई आधारित रोबोट शुरू किया गया है, जो रियल-टाइम गाइडेंस, कई भाषाओं में सहायता और डिजिटल लर्निंग के जरिए सुरक्षा से जुड़ी सीख को और आसान, रोचक और प्रभावी बनाता है। इसके साथ ही, भारी मोटर वाहन (एचएमवी) चालक सिम्युलेटर प्रशिक्षण के जरिए ड्राइवरों को एक ऐसा वास्तविक और सुरक्षित माहौल दिया जाता है, जिसमें वे खतरों को पहचानने, आपात स्थिति में सही प्रतिक्रिया देने और सुरक्षित ड्राइविंग के तरीकों को बेहतर तरीके से सीख सकते हैं।

वेदांता एल्युमीनियम के सीईओ राजेश कुमार ने कहा, “आज की आधुनिक इंडस्ट्री में सुरक्षा, बेहतर कामकाज और उत्पादकता के लिए तकनीक तेजी से जरूरी होती जा रही है। हमारा उद्देश्य सिर्फ नई तकनीकों को अपनाना नहीं है, बल्कि उनका इस्तेमाल वास्तविक कामकाज से जुड़ी चुनौतियों को हल करने के लिए करना है। हमारे प्लांट्स में की जा रही ये पहल ऐसी कनेक्टेड और डेटा आधारित व्यवस्था तैयार कर रही हैं, जिससे हमारी टीमें जोखिमों का पहले से अनुमान लगा सकें, तेजी से फैसले ले सकें और ज्यादा बेहतर तरीके से काम कर सकें। तकनीक के जरिए हो रहा यह बदलाव भारत के ऐसे मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम तैयार करने के लक्ष्य के अनुरूप है, जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, मजबूत और भविष्य के लिए तैयार हों।”

झारसुगुड़ा में, डिजिटल तकनीकें मैन्युफैक्चरिंग के कामकाज को संभालने के तरीके को बदल रही हैं। महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में एआई, मशीन लर्निंग, एडवांस्ड सेंसर, डिजिटल ट्विन और मशीनों की स्थिति की निगरानी करने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे स्मेल्टर में पूरे कामकाज की रियल-टाइम जानकारी मिल रही है। पहले जहां समय-समय पर जांच की जाती थी, अब लगातार निगरानी और पहले से मिलने वाली जानकारी के जरिए कामकाज को ज्यादा भरोसेमंद बनाने, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और तेजी से सही फैसले लेने में मदद मिल रही है।

इन सभी पहलों से वेदांता एल्युमीनियम के कामकाज में बेहतर निगरानी और सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिल रही है। रियल-टाइम जानकारी और बेहतर फैसले लेने की सुविधा से कंपनी की पूरी वैल्यू चेन में कामकाज को बेहतर बनाने में मदद मिल रही है। भारत की सबसे बड़ी एल्युमीनियम निर्माता कंपनी के रूप में, वेदांता एल्युमीनियम तकनीक का इस्तेमाल लगातार बेहतर कामकाज और भारत के मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा क्षमता को मजबूत करने के लिए कर रही है।