CGPSC Scam: पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को हाईकोर्ट से झटका, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत याचिका खारिज

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की वर्ष 2020 और 2021 की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की सिंगल बेंच ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य प्रथम दृष्टया मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में आवेदक की संलिप्तता दर्शाते हैं और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 45 के तहत जमानत देने की आवश्यक शर्तें पूरी नहीं होतीं।
बहस पूरी होने के बाद सुरक्षित रखा था फैसला
टामन सिंह सोनवानी की जमानत याचिका पर गुरुवार को दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हुई थीं। इसके बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सोनवानी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 483 के तहत नियमित जमानत के लिए आवेदन किया था। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इसका विरोध किया।
सोनवानी को जुलाई 2026 में गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले रायपुर की विशेष अदालत ने 20 अगस्त 2026 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप
ईडी के अनुसार, टामन सिंह सोनवानी के CGPSC अध्यक्ष रहने के दौरान भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं हुईं। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा ने फरवरी 2024 में इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज की थी। बाद में सीबीआई ने भी मामले की जांच करते हुए आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र दाखिल किए।
ईडी का आरोप है कि 14 जुलाई 2021 को भर्ती नियमों में संशोधन कर परिवार की परिभाषा से ‘भतीजे’ शब्द को हटा दिया गया। एजेंसी के मुताबिक, इसके बाद सोनवानी के भतीजों नितेश सोनवानी और साहिल सोनवानी का क्रमशः डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी पद पर चयन हुआ।
33 से अधिक अभ्यर्थियों से करीब 3 करोड़ जुटाने का दावा
ईडी ने आरोप लगाया है कि बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड की ओर से ग्रामीण विकास समिति को कथित शैक्षणिक परियोजना के लिए CSR योगदान के तौर पर 45 लाख रुपये दिए गए थे। एजेंसी का दावा है कि 33 से अधिक अभ्यर्थियों से करीब 3 करोड़ रुपये जुटाए गए और अपराध की कुल आय लगभग 3.45 करोड़ रुपये रही।हालांकि, ये सभी आरोप अभियोजन पक्ष और जांच एजेंसी के दावे हैं, जिनका अंतिम न्यायिक निर्धारण होना बाकी है।
तलाशी में दस्तावेज, डिजिटल सामग्री और नकदी जब्त
ईडी ने अदालत को बताया कि 3 जून 2026 को की गई तलाशी के दौरान दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, डिजिटल सामग्री और 8.45 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। कथित अपराध की आय से जुड़ी कुछ संपत्तियों के संबंध में 21 सितंबर 2026 को अस्थायी कुर्की आदेश भी जारी किया गया।
इसके अलावा 22 सितंबर 2026 को ईडी ने सोनवानी समेत सात आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की।
बचाव पक्ष ने कहा- दस्तावेज पहले से जांच एजेंसियों के पास
सोनवानी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील ओटवानी ने दलील दी कि जांच एजेंसियों के पास मामले से संबंधित दस्तावेज और बैंक लेनदेन पहले से उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के बाद सोनवानी के खिलाफ कोई नई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है।
हाईकोर्ट ने मेडिकल आधार पर भी राहत नहीं दी
हाईकोर्ट ने कहा कि केवल आरोपी के इनकार से मनी लॉन्ड्रिंग में उसकी कथित संलिप्तता की आशंका समाप्त नहीं होती। अदालत ने मेडिकल आधार पर जमानत के संबंध में भी कहा कि इसके लिए ऐसा पर्याप्त साक्ष्य होना चाहिए, जिससे यह साबित हो कि हिरासत में आरोपी को आवश्यक उपचार उपलब्ध नहीं कराया जा सकता या उसकी जान को खतरा है।
अदालत ने रिकॉर्ड में इस संबंध में पर्याप्त मेडिकल सामग्री नहीं पाई। ऐसे में PMLA की धारा 45 में निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं मानते हुए हाईकोर्ट ने टामन सिंह सोनवानी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी।




