AMR से बचाव के लिए रायपुर में जागरूकता रैली, 1200 से अधिक फार्मेसी छात्र और फार्मासिस्ट हुए शामिल; दिया एंटीबायोटिक के सही इस्तेमाल का संदेश

रायपुर। एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) यानी रोगाणुरोधी प्रतिरोध के बढ़ते खतरे को लेकर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से शनिवार को राजधानी रायपुर में विशाल जागरूकता रैली निकाली गई। छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल ने फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में स्वस्थ भारत मिशन के अंतर्गत इस रैली का आयोजन किया। इसमें 1200 से अधिक फार्मेसी छात्र-छात्राओं, फार्मासिस्टों और दवा व्यवसाय से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया। रैली के माध्यम से लोगों को एंटीबायोटिक दवाओं का विवेकपूर्ण उपयोग करने और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं नहीं लेने का संदेश दिया गया।
मरीन ड्राइव से निकली जागरूकता रैली
शनिवार सुबह 9 बजे तेलीबांधा मरीन ड्राइव से रैली की शुरुआत हुई। आयुष विभाग के संयुक्त संचालक डॉ. सुनील दास ने हरी झंडी दिखाकर रैली को रवाना किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को शामिल होना था, लेकिन अहिवारा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा के निधन के कारण प्रदेश भाजपा के कार्यक्रम रद्द कर दिए गए थे। इसके बाद मंत्री ने डॉ. सुनील दास को कार्यक्रम के शुभारंभ के लिए अधिकृत किया।
कार्यक्रम की शुरुआत दिवंगत विधायक की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर की गई।
एंटीबायोटिक दवाएं ब्रह्मास्त्र की तरह, अनावश्यक उपयोग खतरनाक: डॉ. सुनील दास
इस अवसर पर डॉ. सुनील दास ने कहा कि एंटीबायोटिक दवाएं ब्रह्मास्त्र की तरह हैं। इनका अनावश्यक इस्तेमाल भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम के माध्यम से इस विषय पर देशवासियों को जागरूक किया है।
उन्होंने फार्मासिस्टों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि डॉक्टर और मरीज के बीच फार्मासिस्ट एक ऐसी कड़ी हैं, जो दवाओं के सुरक्षित और उचित उपयोग को सुनिश्चित करने में अहम योगदान दे सकते हैं।
केवल पंजीयन नहीं, समाज को जागरूक करना भी जिम्मेदारी: अरुण मिश्रा
छत्तीसगढ़ फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष अरुण मिश्रा ने कहा कि काउंसिल की जिम्मेदारी केवल फार्मासिस्टों के पंजीयन तक सीमित नहीं है। समाज को दवाओं के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक करना भी हमारा दायित्व है। उन्होंने कहा कि यह रैली इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
वहीं, काउंसिल के रजिस्ट्रार अश्वनी गुर्देकर ने कहा कि AMR आज पूरी दुनिया के सामने एक गंभीर चुनौती बन चुका है। ICMR की रिपोर्ट के अनुसार कई सामान्य बैक्टीरिया पर भी प्रचलित एंटीबायोटिक दवाओं का असर कम हो रहा है। यदि समय रहते जागरूकता नहीं फैलाई गई, तो भविष्य में सामान्य संक्रमण का इलाज भी मुश्किल हो सकता है।
1200 से अधिक विद्यार्थियों और फार्मासिस्टों ने लिया हिस्सा
रैली में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया की प्रतिनिधि डॉ. आनंद महलवार, काउंसिल के उपाध्यक्ष राहुल तिवारी, कार्यकारिणी समिति सदस्य चंचल दीप कौर, विजय पारख, निकेश देवांगन, नामांकित सदस्य परमानंद पटेल, PCI में शासन के प्रतिनिधि डॉ. अम्बर व्यास और डॉ. दीपेंद्र सिंह सहित काउंसिल के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
इसके अलावा विभिन्न फार्मेसी महाविद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक, शासकीय फार्मासिस्ट, दवा व्यवसाय से जुड़े फार्मासिस्ट और 1200 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भागीदारी निभाई।
नारों के जरिए दिया सुरक्षित दवा उपयोग का संदेश
रैली मरीन ड्राइव से शुरू होकर भगत सिंह चौक और तेलीबांधा होते हुए वापस मरीन ड्राइव पहुंची, जहां इसका समापन हुआ। इस दौरान विद्यार्थियों ने नारों और संदेशों के माध्यम से आम लोगों को जागरूक किया।
रैली में प्रमुख रूप से “एंटीबायोटिक का करो सम्मान, अधूरे कोर्स को करो न दान” और “सेल्फ मेडिकेशन बंद, एंटीबायोटिक का पूरा कोर्स, दवाओं के दुरुपयोग पर रोक और विशेषज्ञ से सलाह” जैसे संदेश दिए गए।
कार्यक्रम का संचालन और आभार प्रदर्शन छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल के सदस्यों ने किया।





