Cyclone Murasu: एक हफ्ते में बंगाल की खाड़ी से उठे दो तूफान, आखिर कैसे बनते हैं चक्रवात? अर्नब से कितना अलग है मुरासु, जानिए हर सवाल का जवाब

नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में एक बार फिर चक्रवाती गतिविधियां तेज हो गई हैं। चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ के 3 नवंबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकराने का अनुमान जताया गया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, तूफान 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के साथ नेल्लोर और नारसपुर के बीच दस्तक दे सकता है। इसके सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात या मंगलवार सुबह तट से टकराने की संभावना है।
खास बात यह है कि एक सप्ताह के भीतर बंगाल की खाड़ी में यह दूसरा चक्रवाती तूफान है। इससे पहले चक्रवात ‘अर्नब’ ने 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट को प्रभावित किया था। इसके असर से आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु के तटीय इलाकों में भी मौसम प्रभावित हुआ था।
लगातार दो चक्रवाती तूफानों की स्थिति ने मौसम वैज्ञानिकों के सामने कई सवाल खड़े किए हैं। आखिर समुद्र में चक्रवात बनते कैसे हैं? एक तूफान के गुजरने के तुरंत बाद दूसरा तूफान कैसे तैयार हो जाता है? मुरासु कितना शक्तिशाली है और अर्नब के मुकाबले कितना खतरनाक हो सकता है? आइए समझते हैं।
पहले समझिए, समुद्र में कैसे बनता है चक्रवाती तूफान?
चक्रवाती तूफान अचानक पैदा नहीं होता। इसके बनने के पीछे समुद्र के तापमान, हवा में नमी, वायुमंडलीय दबाव और पृथ्वी के घूमने जैसी कई प्राकृतिक परिस्थितियां जिम्मेदार होती हैं।
1. समुद्र में निम्न दबाव का क्षेत्र बनना
चक्रवात बनने की प्रक्रिया समुद्र के ऊपर निम्न दबाव का क्षेत्र बनने से शुरू होती है। बंगाल की खाड़ी में यह स्थिति अक्सर उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में चलने वाली ईस्टरली वेव्स या अन्य मौसमी विक्षोभों के कारण बनती है।
इस क्षेत्र में आसपास की हवा तेजी से आने लगती है और मौसम में अस्थिरता बढ़ने लगती है।
2. पृथ्वी का घूमना बदल देता है हवाओं की दिशा
निम्न दबाव वाले क्षेत्र में आसपास के उच्च दबाव वाले इलाकों से हवाएं केंद्र की ओर बढ़ती हैं। पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने के कारण कोरिऑलिस प्रभाव पैदा होता है, जिससे हवाएं सीधी दिशा में चलने के बजाय मुड़कर घूमने लगती हैं।
इसी प्रक्रिया से चक्रवात का घुमावदार स्वरूप तैयार होता है।
3. गर्म समुद्री पानी बनता है तूफान का ईंधन
चक्रवात को विकसित होने के लिए समुद्र का गर्म होना बेहद जरूरी है। इसके लिए समुद्र की सतह का तापमान सामान्यतः कम से कम 26.5 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। यह गर्म पानी करीब 50 मीटर की गहराई तक उपलब्ध हो तो तूफान को लगातार ऊर्जा मिलती रहती है।
गर्म समुद्र से उठने वाली नमी युक्त हवा ऊपर जाती है और विशाल बादलों का निर्माण करती है। यही नमी चक्रवात को ताकत देने का काम करती है।
4. संघनन से निकलने वाली गर्मी बढ़ाती है ताकत
जब गर्म और नमी से भरी हवा ऊपर उठती है, तो ठंडी होकर संघनित होती है। इससे बादल और बारिश बनते हैं तथा गुप्त ऊष्मा निकलती है।
यह गर्मी निम्न दबाव वाले क्षेत्र को और मजबूत करती है। परिणामस्वरूप आसपास की हवाएं तेजी से केंद्र की ओर खिंचने लगती हैं और चक्रवात की ताकत बढ़ने लगती है।
5. विंड शियर कम होना भी जरूरी
चक्रवात के विकास में विंड शियर यानी अलग-अलग ऊंचाइयों पर हवाओं की गति और दिशा में अंतर की अहम भूमिका होती है।
यदि ऊपरी और निचले वायुमंडल की हवाओं में बहुत ज्यादा अंतर हो, तो तूफानी बादलों का ढांचा बिगड़ सकता है। इसके विपरीत कम विंड शियर चक्रवात को व्यवस्थित और शक्तिशाली बनने में मदद करता है।
6. कब सामान्य तूफान बन जाता है चक्रवाती तूफान?
जब किसी विकसित मौसमी सिस्टम के केंद्र के आसपास हवाओं की निरंतर अधिकतम गति 62 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक हो जाती है, तब भारतीय मौसम विभाग उसे चक्रवाती तूफान की श्रेणी में रखता है। इसके बाद परिस्थितियों के अनुसार यह गंभीर और अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है।
एक हफ्ते में दो चक्रवात कैसे बन गए?
बंगाल की खाड़ी में एक सप्ताह के भीतर दो चक्रवाती सिस्टम बनने के पीछे समुद्र और वायुमंडल की अनुकूल परिस्थितियां अहम मानी जाती हैं।
1. चक्रवात के बाद भी समुद्र का गर्म रहना
आमतौर पर चक्रवात के गुजरने के बाद समुद्र की सतह ठंडी हो जाती है। तेज हवाएं समुद्र के पानी को मथती हैं और नीचे का ठंडा पानी ऊपर आ जाता है। इससे तत्काल दूसरा चक्रवात बनने की संभावना कम हो सकती है।
लेकिन बंगाल की खाड़ी में मानसून के बाद समुद्र की ऊपरी सतह पर मीठे पानी की परत और गहराई तक मौजूद गर्म पानी के कारण समुद्र का तापमान लंबे समय तक अनुकूल बना रह सकता है। इससे दूसरे चक्रवात को ऊर्जा मिल सकती है।
2. मानसून के बाद हवाओं की अनुकूल स्थिति
अक्टूबर और नवंबर में मानसून की वापसी के बाद वायुमंडलीय परिस्थितियां चक्रवात बनने के लिए अनुकूल हो सकती हैं। इस दौरान विंड शियर कम होने और समुद्र का तापमान अधिक रहने से निम्न दबाव वाले क्षेत्र को विकसित होने का मौका मिलता है।
3. समुद्र में अतिरिक्त गर्मी की भूमिका
समुद्र की सतह का सामान्य से अधिक गर्म होना चक्रवातों की तीव्रता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कारक है। गर्म समुद्र से मिलने वाली ऊर्जा और पर्याप्त नमी के कारण तूफानी सिस्टम तेजी से विकसित हो सकता है।
चक्रवात अर्नब और मुरासु में कौन ज्यादा खतरनाक?
दोनों चक्रवातों की तीव्रता को लेकर उपलब्ध विवरणों में अंतर बताया गया है। दिए गए पूर्वानुमान के मुताबिक, चक्रवात अर्नब अधिक शक्तिशाली था और अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान के रूप में तट से टकराया था। वहीं, मुरासु के अपेक्षाकृत कमजोर रहने का अनुमान जताया गया है।
| आधार | चक्रवात अर्नब | चक्रवात मुरासु |
|---|---|---|
| संभावित प्रभाव | आंध्र, ओडिशा, तमिलनाडु | आंध्र और आसपास के तटीय इलाके |
| तीव्रता | अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान | पूर्वानुमान के अनुसार प्रचंड चक्रवाती तूफान |
| हवाओं की रफ्तार | उपलब्ध विवरण में स्पष्ट नहीं | 100-110 किमी प्रति घंटा |
| संभावित असर | भारी तबाही का दावा | तेज हवाएं और भारी बारिश की आशंका |
हालांकि, तूफान की वास्तविक ताकत और नुकसान का आकलन तट से टकराने के बाद ही किया जा सकता है।
नोट: चक्रवातों की तीव्रता, नाम और संभावित लैंडफॉल से जुड़ी जानकारी मौसम विभाग के आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार अपडेट की जानी चाहिए।





