सुरक्षा के लिए लगे क्रैश बैरियर अब बन रहे जानलेवा खतरा

० NH-130C पर जर्जर गार्ड रेल से बढ़ा हादसों का डर, लोगों ने उठाई तत्काल सुधार की मांग
राधे पटेल , गरियाबंद/देवभोग।राष्ट्रीय राजमार्ग NH-130C पर वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए लगाए गए क्रैश बैरियर (गार्ड रेल) अब खुद हादसों की वजह बनते नजर आ रहे हैं। सड़क किनारे सुरक्षा के उद्देश्य से लगाए गए ये लोहे के बैरियर लंबे समय से मरम्मत और निगरानी के अभाव में जर्जर हो चुके हैं, जिससे यात्रियों और वाहन चालकों की चिंता बढ़ गई है।
क्रैश बैरियर का मुख्य उद्देश्य दुर्घटना के दौरान वाहन को सड़क से नीचे गिरने या अनियंत्रित होने से रोकना होता है, लेकिन खराब रखरखाव अब इन्हें खतरनाक बना रहा है।
कई जगह टूटे, उखड़े और टेढ़े पड़े हैं बैरियर
अभनपुर, राजिम, गरियाबंद और देवभोग होते हुए ओडिशा को जोड़ने वाला यह महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग घने जंगलों, अंधे मोड़ों और कई स्थानों पर सिंगल लेन सड़क से होकर गुजरता है। ऐसे संवेदनशील इलाकों में लगे कई क्रैश बैरियर टूटे, उखड़े और टेढ़े दिखाई दे रहे हैं।
कुछ स्थानों पर बैरियर पूरी तरह सड़क किनारे फेंके गए हैं, जबकि कई जगह उनके नुकीले हिस्से खुले पड़े हैं, जो दुर्घटना की स्थिति में गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।

विभागीय लापरवाही पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि बैरियर लगाए जाने के बाद विभाग द्वारा शायद ही कभी उनकी नियमित जांच या मरम्मत कराई गई हो। लगातार बारिश, जंग और छोटे-बड़े हादसों के कारण इनकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
रात के समय या ओवरटेकिंग के दौरान वाहन चालक क्षतिग्रस्त बैरियरों को समय पर नहीं देख पाते, जिससे दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों ने भी जताई चिंता
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि क्रैश बैरियर तभी प्रभावी होते हैं जब उनकी नियमित निगरानी, समय पर मरम्मत और सही इंस्टॉलेशन सुनिश्चित किया जाए। गलत ऊंचाई, ढीले पोल और टूटे हिस्से दुर्घटना को और अधिक गंभीर बना सकते हैं।
सुरक्षा ऑडिट और तत्काल मरम्मत की मांग
स्थानीय नागरिकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और संबंधित विभाग से पूरे NH-130C मार्ग का सुरक्षा ऑडिट कराने तथा टूटे और जर्जर बैरियरों को तत्काल बदलने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुधार कार्य नहीं किया गया तो भविष्य में बड़े सड़क हादसे हो सकते हैं। सड़क सुरक्षा केवल निर्माण तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसकी नियमित निगरानी और रखरखाव भी उतना ही जरूरी है।





