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रायपुर के कुष्ठ अनुसंधान संस्थान पर सवाल: 7 महीने से बिना मरीजों के नर्सों को मिल रही तनख्वाह!

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रायपुर।राजधानी रायपुर स्थित केंद्र सरकार के कुष्ठ अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। 45 वर्ष पुराने इस संस्थान की उपयोगिता और कार्यप्रणाली पर अब प्रश्नचिह्न लगने लगे हैं। आरोप है कि संस्थान में पिछले कई महीनों से मरीजों का दाखिला नहीं होने के बावजूद संविदा नर्सों को नियमित वेतन दिया जा रहा है।

बिना मरीजों के 5 नर्सों की नियुक्ति?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अस्पताल के खाली पड़े वार्डों के लिए 5 संविदा नर्सों की नियुक्ति की गई है। प्रत्येक नर्स को करीब 25 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है।बताया जा रहा है कि पिछले 7 महीनों से अस्पताल में मरीजों का एडमिशन लगभग शून्य है। इसके बावजूद नर्सों के वेतन पर अब तक करीब 8.75 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जिससे संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की भी कमी

सूत्रों के मुताबिक, 100 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में मरीजों के लिए रक्त जांच और एक्स-रे जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। वहीं कुष्ठ रोगियों के बेहतर उपचार के लिए जरूरी रिसर्च गतिविधियां भी वर्षों से बंद पड़ी हैं।

जांच की उठी मांग

स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि केंद्र सरकार इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए और यह पता लगाए कि मरीजों की अनुपस्थिति के बावजूद नियुक्तियां और वेतन भुगतान किस आधार पर किया जा रहा है।

दूसरी ओर कुष्ठ उन्मूलन पर राष्ट्रीय कार्यशाला

इसी बीच छत्तीसगढ़ सरकार 12-13 जून को रायपुर में कुष्ठ रोग के “जीरो ट्रांसमिशन” लक्ष्य को लेकर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित कर रही है। इसमें देश के 121 ऐसे जिले भाग ले रहे हैं जहां कुष्ठ रोग अभी भी चुनौती बना हुआ है।कार्यशाला में केंद्र सरकार की अतिरिक्त सचिव, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के वरिष्ठ अधिकारी तथा स्वास्थ्य मंत्रालय का प्रतिनिधिमंडल भी शामिल होने वाला है।