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छत्तीसगढ़ में MBBS इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ सकता है, सरकार कर रही विचार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में एमबीबीएस इंटर्न, पीजी रेजिडेंट और सुपरस्पेशलिटी रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बड़ी बढ़ोतरी की तैयारी चल रही है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है और जल्द ही इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिया जा सकता है।

प्रस्ताव के अनुसार एमबीबीएस इंटर्न का स्टाइपेंड ₹30,000 प्रतिमाह, पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों का ₹1.20 लाख प्रतिमाह और सुपरस्पेशलिटी (DM/MCh) रेजिडेंट डॉक्टरों का स्टाइपेंड ₹1.50 लाख प्रतिमाह किए जाने पर विचार किया जा रहा है।

यह मुद्दा हाल ही में जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) द्वारा मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को सौंपे गए ज्ञापन में प्रमुखता से उठाया गया था। सूत्रों के मुताबिक स्टाइपेंड बढ़ाने के प्रस्ताव पर विभागीय स्तर पर प्रक्रिया सोमवार से शुरू हो सकती है।

बॉन्ड नीति में बदलाव की भी मांग

JDA ने सरकार से बॉन्ड अवधि और बॉन्ड राशि को तर्कसंगत बनाने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि उच्च शिक्षा के लिए संपत्ति या मूल दस्तावेज गिरवी रखने की अनिवार्यता समाप्त कर केवल शपथ-पत्र के आधार पर एनओसी (NOC) जारी करने की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

चिकित्सकों ने गिनाईं प्रमुख समस्याएं

एसोसिएशन के अनुसार प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था मेडिकल इंटर्न, जूनियर और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के निरंतर कार्य पर निर्भर है। ये चिकित्सक 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं, आईसीयू, ट्रॉमा सेंटर, ऑपरेशन थिएटर, वार्ड, ओपीडी, आईपीडी, मेडिकल शिक्षा और अनुसंधान जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में उनका स्टाइपेंड और मानदेय कई राज्यों की तुलना में कम है, जिससे युवा डॉक्टरों में असंतोष बढ़ रहा है और विशेषज्ञ चिकित्सकों का पलायन भी हो रहा है।

अन्य प्रमुख मांगें

JDA ने सरकार से मांग की है कि:

0 NEET-PG और NEET-SS में चयनित डॉक्टरों की पूर्व बॉन्ड सेवा का समायोजन किया जाए।
0 बॉन्ड पोस्टिंग अधिकतम 30 दिनों के भीतर सुनिश्चित की जाए।
0 विलंब होने पर चिकित्सकों को अन्य करियर विकल्प अपनाने की अनुमति मिले।
0 इन-सर्विस और संविदा चिकित्सकों की वेतन विसंगतियां दूर की जाएं।
0 जूनियर रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट और डिमॉन्स्ट्रेटर पदों पर समयबद्ध भर्ती की जाए।
0 चिकित्सकों को महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता (TA), नॉन-प्रैक्टिस अलाउंस (NPA) सहित अन्य वैधानिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

महंगाई सूचकांक (CPI) के आधार पर स्टाइपेंड और वेतन के स्वचालित पुनरीक्षण की व्यवस्था लागू की जाए।

JDA रायपुर के अध्यक्ष डॉ. पीयूष श्रीवास्तव ने कहा कि युवा डॉक्टर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं। यदि उन्हें सम्मानजनक स्टाइपेंड, पारदर्शी सेवा नीति, समयबद्ध पदस्थापना और बेहतर कार्य परिस्थितियां नहीं मिलेंगी, तो इसका असर पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर पड़ेगा।

हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन है और अंतिम निर्णय का इंतजार है।