लंबित मांगों को लेकर फिर सड़क पर उतरे स्वास्थ्यकर्मी, रायगढ़ में रैली निकाल CM के नाम सौंपा ज्ञापन

० निजीकरण और आउटसोर्सिंग पर रोक, रिक्त पदों पर भर्ती व वेतन विसंगति दूर करने सहित कई मांगें उठाईं; चेतावनी- जल्द फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन होगा तेज
रायगढ़। वर्षों से लंबित मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज स्वास्थ्य कर्मचारियों ने गुरुवार को रायगढ़ में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रांतीय स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले सैकड़ों कर्मचारियों ने मिनी स्टेडियम से कलेक्ट्रेट तक विशाल पैदल रैली निकालकर प्रदर्शन किया और प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि वर्ष 2023 के अनिश्चितकालीन आंदोलन के समय सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक अधिकांश वादे पूरे नहीं हुए। इससे स्वास्थ्य कर्मचारियों में लगातार असंतोष बढ़ रहा है।
ज्ञापन में संघ ने स्वास्थ्य विभाग में निजीकरण, ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि इन व्यवस्थाओं से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। साथ ही विभाग में 35 से 40 प्रतिशत तक रिक्त पड़े स्वीकृत पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से जल्द भरने की मांग भी की गई।
स्वास्थ्य कर्मचारियों ने ‘समान काम, समान वेतन’ का सिद्धांत लागू करने, संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान सुविधाएं देने तथा जीवनदीप समिति के कर्मचारियों के लिए पूरे प्रदेश में एक समान मानदेय तय करने की मांग उठाई। इसके अलावा वेतन संबंधी विसंगतियों को दूर करने और लंबित मामलों का जल्द निराकरण करने की भी मांग की गई।
संघ ने शासन से आग्रह किया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा भेजे गए पुनरीक्षित वेतनमान के प्रस्ताव पर तत्काल निर्णय लिया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि यदि आठवें वेतन आयोग के लागू होने से पहले यह प्रस्ताव मंजूर नहीं हुआ, तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी कि यदि उनकी लंबित मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।





