मोबाइल और कंप्यूटर का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल आंखों के लिए खतरा, नियमित जांच जरूरी : डॉ. दिनेश मिश्र

० रोटरी क्लब के व्याख्यान में वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ ने आंखों की देखभाल, डिजिटल स्क्रीन के दुष्प्रभाव और नेत्रदान के महत्व पर दी विस्तृत जानकारी
रायपुर। वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग आंखों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। लंबे समय तक स्क्रीन पर नजरें टिकाए रखने से आंखों में सूखापन, जलन, सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना और कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने लोगों से नियमित नेत्र जांच कराने और आंखों की देखभाल को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।
रोटरी क्लब में आयोजित व्याख्यान को संबोधित करते हुए डॉ. मिश्र ने कहा कि आंखें प्रकृति का अनमोल उपहार हैं और समय पर जांच, उचित उपचार तथा जागरूकता के माध्यम से अधिकांश नेत्र रोगों से बचाव संभव है। उन्होंने बताया कि जन्मजात नेत्र विकारों की समय पर पहचान होने पर उनका सफल उपचार किया जा सकता है। वहीं विटामिन-ए की कमी बच्चों में रतौंधी और कॉर्निया को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, पपीता, आम, दूध और अंडे जैसे पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि बैक्टीरिया, वायरस और फंगस से होने वाले संक्रमण भी आंखों की रोशनी प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे मामलों में स्वयं दवा लेने के बजाय नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। निकट दृष्टि, दूर दृष्टि और एस्टिग्मैटिज्म जैसी समस्याएं भी बच्चों और युवाओं में तेजी से बढ़ रही हैं, इसलिए नियमित जांच कराकर सही नंबर का चश्मा पहनना जरूरी है।
डॉ. मिश्र ने बताया कि बढ़ती उम्र में मोतियाबिंद अंधत्व का प्रमुख कारण है, जबकि ग्लूकोमा (कांचबिंदु) बिना शुरुआती लक्षणों के धीरे-धीरे आंखों की रोशनी खत्म कर सकता है। इसलिए 40 वर्ष की आयु के बाद नियमित नेत्र परीक्षण कराना बेहद आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि मधुमेह और उच्च रक्तचाप का असर आंखों की रेटिना पर पड़ता है और समय पर इलाज न मिलने पर स्थायी दृष्टि हानि हो सकती है।
आंखों की सुरक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों में खिलौनों और नुकीली वस्तुओं से तथा वयस्कों में सड़क दुर्घटनाओं, वेल्डिंग, फैक्ट्री कार्य और रसायनों के संपर्क से आंखों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। दीपावली और होली जैसे त्योहारों में सुरक्षात्मक चश्मे का उपयोग करना चाहिए। यदि किसी रसायन का संपर्क आंखों से हो जाए तो तुरंत साफ पानी से आंखें धोकर अस्पताल पहुंचना चाहिए।
डिजिटल स्क्रीन से बचाव के लिए डॉ. मिश्र ने 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह दी। इसके तहत हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें, बार-बार पलकें झपकाएं, उचित रोशनी में काम करें और स्क्रीन से पर्याप्त दूरी बनाए रखें।
व्याख्यान के दौरान उन्होंने नेत्रदान के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद नेत्रदान करके दो कॉर्नियल दृष्टिबाधित लोगों को नई रोशनी दी जा सकती है। यह मानव सेवा का सबसे बड़ा कार्य है और समाज में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
अंत में डॉ. मिश्र ने कहा कि नियमित नेत्र परीक्षण, संतुलित आहार, स्वच्छता, सुरक्षात्मक उपाय, मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप का नियंत्रण और समय पर उपचार अपनाकर अधिकांश नेत्र रोगों से बचाव संभव है। स्वस्थ आंखें ही स्वस्थ और खुशहाल जीवन की आधारशिला हैं।





