CG Silk News: रेशम पालन से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर, 100 कृषकों ने सीखी वैज्ञानिक तकनीक; ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान’ सम्मेलन में हुआ मंथन

रायपुर। रेशम पालन को किसानों की आय और आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत जरिया बनाने की दिशा में रायपुर में कृषक सम्मेलन का आयोजन किया गया। ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान’ कार्यक्रम के तहत आयोजित इस सम्मेलन में रायपुर, धमतरी, दुर्ग और महासमुंद के करीब 100 किसानों को वैज्ञानिक रेशम पालन, गुणवत्तापूर्ण कोकून उत्पादन और आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई। अधिकारियों और विशेषज्ञों ने किसानों से व्यावसायिक स्तर पर रेशम पालन अपनाने का आह्वान किया।
वैज्ञानिक तकनीक से बढ़ेगी किसानों की आमदनी
केंद्रीय रेशम बोर्ड और ग्रामोद्योग विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 2 सितंबर 2026 को कार्यालय उपसंचालक रेशम, रायपुर में शहतूत रेशम कृषक सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ग्रामोद्योग विभाग के सचिव राजेश राणा (IAS) ने किसानों को वैज्ञानिक तरीके से रेशम पालन अपनाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि रेशम पालन को किसानों की आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम बनाया जा सकता है। साथ ही ‘सिल्क-समग्र’ योजना का लाभ उठाकर रेशम पालन को व्यावसायिक स्तर पर विकसित करने पर जोर दिया।
रिसर्च और किसानों के बीच तकनीकी अंतर कम करना लक्ष्य
बीटीटीएसएसओ बिलासपुर की निदेशक डॉ. पुनीतावती ने कहा कि ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान’ कार्यक्रम का उद्देश्य रिसर्च संस्थानों और किसानों के बीच मौजूद तकनीकी अंतर को कम करना है।
उन्होंने बाई-वोल्टाइन क्रॉप और शहतूत की खेती के जरिए किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं की जानकारी दी और आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर दिया।
सेरीकल्चर से रोजगार और अतिरिक्त आय का अवसर
रेशम मुख्यालय रायपुर के संयुक्त संचालक सी.एस. नोनहारे ने सेरीकल्चर को रोजगार और अतिरिक्त आय का बेहतर माध्यम बताया। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक रियरिंग तकनीक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन पर ध्यान देने की अपील की।
उप संचालक रेशम रायपुर ठाकुर राम उइके ने रायपुर समेत अधीनस्थ जिलों में संचालित विभागीय गतिविधियों और शहतूत रेशम पालन के विस्तार की जानकारी दी।
रोग प्रबंधन से लेकर कीटाणुशोधन तक दी गई जानकारी
वैज्ञानिक ‘बी’ कुमारी रंजीता बाई एच. ने रेशम कीटों में होने वाले रोग, रोग प्रबंधन, रियरिंग हाउस की स्वच्छता और प्रभावी कीटाणुशोधन के बारे में किसानों को जानकारी दी।
तकनीकी विशेषज्ञ अरविंद मसराम ने रेशम कीट की पांचों अवस्थाओं के साथ पत्ती प्रबंधन, मोल्टिंग, माउंटिंग और पोस्ट-कोकून गतिविधियों की तकनीकी जानकारी साझा की।
चार जिलों के 100 किसान हुए शामिल
सम्मेलन में रायपुर जिले से 20, धमतरी से 40, दुर्ग से 10 और महासमुंद से 30 किसान शामिल हुए। कार्यक्रम में किसानों को वैज्ञानिक रेशम पालन, शहतूत क्षेत्र के विस्तार और बेहतर गुणवत्ता वाले कोकून उत्पादन के जरिए आय बढ़ाने के उपाय बताए गए।
कार्यक्रम के समापन पर कुमारी रंजीता बाई एच. ने सम्मेलन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और किसानों के प्रति आभार व्यक्त किया।





