राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर हमला, बोले- ‘वोट गया तो संविधान और कानून बनाने वाला सिस्टम भी गया’

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और वोटर लिस्ट से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए। करीब सवा घंटे की देरी से शुरू हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कहा कि भारत में एंटी-इन्कंबेंसी एक मजबूत राजनीतिक प्रवृत्ति रही है, लेकिन उनका आरोप है कि भाजपा शासित राज्यों में यह प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में वोट की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और यदि वोट की विश्वसनीयता प्रभावित होती है तो इसका असर संविधान और संस्थानों पर भी पड़ता है।
‘एंटी-इन्कंबेंसी खत्म कैसे हो जाती है?’
राहुल गांधी ने कहा कि इंदिरा गांधी के बांग्लादेश युद्ध के बाद लोकप्रियता के चरम पर पहुंचने के बावजूद कुछ वर्षों में उनके खिलाफ एंटी-इन्कंबेंसी पैदा हुई। उन्होंने कहा कि ऐसा कई कांग्रेस प्रधानमंत्रियों के साथ भी हुआ है।
उन्होंने सवाल उठाया कि हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में अलग-अलग सरकारों के खिलाफ रही एंटी-इन्कंबेंसी किस तरह खत्म हो जाती है। राहुल ने इराक और उत्तर कोरिया का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां लोकतंत्र नहीं होता, वहां एंटी-इन्कंबेंसी भी नहीं होती।
‘वोट गया तो कानून और संस्थान भी प्रभावित होंगे’
राहुल गांधी ने कहा कि अगर वोट की प्रक्रिया कमजोर होती है तो संविधान अपनी ताकत खो सकता है। उनके मुताबिक, संविधान कमजोर हुआ तो कानून और उसके बाद संस्थानों पर भी असर पड़ेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लंबे समय से वोट से जुड़ी समस्याएं उठाई जा रही हैं। राहुल ने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी लोगों के वोट की सुरक्षा करना है।
चुनाव आयोग पर क्या बोले राहुल गांधी?
राहुल गांधी ने दावा किया कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में गड़बड़ियां हो रही हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी सवाल उठाए और कहा कि दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने उनके कार्यकाल में लिए गए कुछ फैसलों को लेकर आपत्तियां दर्ज की हैं।
यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में ये आपत्तियां SIR, नए मतदाताओं के पंजीकरण, Form-6 में बदलाव, मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने और डेटा सुरक्षा जैसे मुद्दों से जुड़ी बताई गई हैं।
Form-6 को लेकर क्या विवाद है?
रिपोर्ट के मुताबिक, नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में SIR से संबंधित सवाल जोड़े गए थे। इसमें आवेदक से पूछा गया कि उसका, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR की मतदाता सूची में था या नहीं।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, विवेक जोशी ने मई में इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी और नियमों में संशोधन की जरूरत बताई थी। सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति से सहमति जताई थी।
चुनाव आयोग ने आरोपों पर क्या कहा?
चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों और आंतरिक मतभेद के संकेतों को खारिज करते हुए कहा है कि आयोग एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था है। आयोग के मुताबिक, लिखित टिप्पणियां, सुझाव, तकनीकी राय और आंतरिक जांच-पड़ताल उसकी सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा हैं।
ECI ने कहा कि अंतिम फैसले आयोग द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए हैं और SIR समेत पिछले एक साल के फैसले पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम हैं। आयोग ने यह भी कहा कि केवल कुछ आंतरिक टिप्पणियों को सामने रखने से पूरी प्रक्रिया की तस्वीर नहीं मिलती।
राहुल गांधी ने एक्स पर क्या लिखा था?
प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था कि वह शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। उन्होंने पोस्ट में संविधान और वोट से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी बात रखी थी।
इस पूरे विवाद के केंद्र में एक तरफ चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े फैसलों पर उठी आपत्तियों की रिपोर्ट है, वहीं दूसरी तरफ आयोग का आधिकारिक पक्ष है कि ये टिप्पणियां सामान्य आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा थीं और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।




