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Raipur News: शीतला माता मंदिर के सूचना बोर्ड पर विवाद, यादव समाज ने जताई नाराजगी; पीठाधीश के खिलाफ थाने में शिकायत

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रायपुर। राजधानी रायपुर के पुरानी बस्ती स्थित सिद्धपीठ शीतला माता मंदिर परिसर में लगे एक सूचना बोर्ड को लेकर विवाद गहरा गया है। बोर्ड पर यादव समाज की महिलाओं के लिए कथित तौर पर आपत्तिजनक शब्द लिखे जाने पर समाज के लोगों ने कड़ी नाराजगी जताई है। मामले में यादव समाज के प्रतिनिधियों ने पुरानी बस्ती थाने पहुंचकर मंदिर के पीठाधीश नीरज सैनी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। वहीं, पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने भी इस तरह की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी समाज के लोगों के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल उचित नहीं है।

सूचना बोर्ड पर लिखे शब्दों को लेकर विवाद

जानकारी के अनुसार, मंदिर परिसर में लगे सूचना बोर्ड पर लिखा था कि “ठग रौताइनों से सावधान” और जल चढ़ाने के लिए किसी भी रौताइन को रुपये न देने की अपील की गई थी। यादव समाज के लोगों का आरोप है कि इस भाषा से समाज की महिलाओं का अपमान हुआ है और सामूहिक भावनाएं आहत हुई हैं। समाज ने बोर्ड से कथित आपत्तिजनक शब्द हटाने की मांग की है।

पुरानी बस्ती थाने पहुंचकर की शिकायत

विवाद को लेकर यादव समाज के प्रतिनिधि पुरानी बस्ती थाने पहुंचे और मंदिर के पीठाधीश नीरज सैनी के खिलाफ शिकायत दी। समाज की ओर से कहा गया कि सार्वजनिक धार्मिक स्थल पर लगे सूचना बोर्ड की भाषा किसी समाज की महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली नहीं होनी चाहिए। प्रतिनिधियों ने संबंधित शब्दों को हटाने की मांग भी रखी।

पीठाधीश बोले- श्रद्धालुओं से पैसे लेने की शिकायतों के बाद लगाए गए पोस्टर

मामले पर मंदिर के पीठाधीश नीरज सैनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि करीब 17 साल पहले भी इस तरह के पोस्टर लगाए गए थे और उस समय किसी ने आपत्ति नहीं जताई थी। उनके मुताबिक, श्रद्धालुओं से जल चढ़ाने के नाम पर पैसे लेने की शिकायतें मिल रही थीं, इसलिए लोगों को रुपये न देने की अपील की गई थी।

नीरज सैनी ने कहा कि बीती रात बड़ी संख्या में लोग मंदिर परिसर पहुंचे और शोर-शराबा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों ने पोस्टर पर टेप चिपका दिया और उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत की। उनका कहना है कि मंदिर में पूजा-पाठ करने वाले श्रद्धालुओं से किसी को पैसे नहीं लेने चाहिए।

विकास उपाध्याय ने भी जताई आपत्ति

पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि मंदिरों से लोगों की आस्था और भावनाएं जुड़ी होती हैं। ऐसे में किसी समाज के लोगों के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवान संबंधित व्यक्ति को सद्बुद्धि दें।

आपसी सहमति से शब्द हटाने की चर्चा

जानकारी के अनुसार, विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से सूचना बोर्ड से संबंधित शब्द हटाने की बात भी सामने आई है। फिलहाल, मंदिर परिसर के बोर्ड पर लिखी भाषा को लेकर विवाद बना हुआ है। मामले में पुलिस की ओर से आगे की कार्रवाई की जानकारी सामने आने का इंतजार है।