Chhattisgarh Housing News: बल्क परचेस से छत्तीसगढ़ की आवासीय योजनाओं को मिली नई रफ्तार, 68 मकान GST विभाग ने खरीदे

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के बल्क परचेस संबंधी फैसले का असर अब प्रदेश की आवासीय योजनाओं में दिखाई देने लगा है। लंबे समय से खाली पड़े मकानों को पात्र हितग्राहियों के अलावा अन्य आय वर्ग के लोगों और संस्थाओं को बेचने की अनुमति मिलने के बाद आवासों की बिक्री को नई गति मिली है। इससे एक ओर खाली भवनों का बेहतर उपयोग हो रहा है, वहीं दूसरी ओर शासकीय, अर्द्धशासकीय और निजी संस्थाओं को अपने कर्मचारियों के लिए आवास उपलब्ध कराने का विकल्प मिल रहा है।
दुर्ग से रायगढ़ तक 68 मकानों की खरीद
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की विभिन्न आवासीय योजनाओं में बल्क परचेस के तहत कई संस्थाओं ने मकानों की खरीद की है। जीएसटी विभाग ने दुर्ग, जगदलपुर, बिलासपुर और रायगढ़ में कुल 68 आवास खरीदे हैं।
इनमें दुर्ग में 24 मकान करीब 6.50 करोड़ रुपये, जगदलपुर में 16 मकान करीब 6 करोड़ रुपये, बिलासपुर में 25 मकान करीब 10.35 करोड़ रुपये और रायगढ़ में 3 मकान करीब 92 लाख रुपये में खरीदे गए हैं। इन 68 आवासों की कुल कीमत करीब 23.77 करोड़ रुपये है।

नवा रायपुर में मेफेयर ने खरीदे 128 मकान
नवा रायपुर अटल नगर में प्रधानमंत्री सह मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत मेफेयर संस्था ने 128 मकान करीब 16.20 करोड़ रुपये में खरीदे हैं। वहीं, मैट्स विश्वविद्यालय ने आरंग में 30 मकान करीब 2.20 करोड़ रुपये में खरीदे हैं।
इसके अलावा नवा रायपुर में विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय ने भी 128 फ्लैट्स की बल्क खरीद का निर्णय लिया है। इन फ्लैट्स की कुल कीमत करीब 16.20 करोड़ रुपये बताई गई है।
खाली भवनों की समस्या से निपटने के लिए लिया गया फैसला
नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-16, 30 और 34 में प्रधानमंत्री सह मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत EWS और LIG वर्ग के लिए आवासों का निर्माण किया गया है। योजना के पहले चरण में कुल 6,296 भवनों का निर्माण किया गया था।
लगातार विज्ञापन जारी करने के बावजूद कुछ आवास लंबे समय तक नहीं बिक सके। इससे भवनों के रखरखाव और सुरक्षा के साथ-साथ मंडल के वित्तीय संसाधनों पर भी असर पड़ रहा था।
इसी को देखते हुए राज्य मंत्रिपरिषद ने 14 नवंबर 2025 को फैसला लिया कि तीन बार विज्ञापन जारी होने के बाद भी अविक्रित रहने वाले आवासों को पात्र हितग्राहियों के अलावा अन्य आय वर्ग के व्यक्तियों और संस्थाओं को भी बेचा जा सकेगा। हालांकि, ऐसे खरीदारों को शासन की ओर से मिलने वाले अनुदान का लाभ नहीं दिया जाएगा।
EWS-LIG हितग्राहियों को अनुदान का लाभ जारी
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने कहा कि किसी भी आवासीय योजना की सफलता तभी है, जब बनाए गए मकानों में लोगों की बसाहट हो। लंबे समय से खाली भवनों की सुरक्षा, रखरखाव और मंडल के वित्तीय संसाधनों के बेहतर उपयोग को ध्यान में रखते हुए शासन ने यह निर्णय लिया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री सह मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत EWS और LIG वर्ग के पात्र हितग्राहियों को निर्धारित शासकीय एवं केंद्रीय अनुदान का लाभ पहले की तरह मिलता रहेगा। वहीं, अन्य आय वर्ग के व्यक्ति और संस्थाएं बिना अनुदान के आवास खरीद सकेंगी।
ऑनलाइन ऑफर के जरिए हो रही बिक्री
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के आयुक्त अवनीश कुमार शरण ने बताया कि प्रदेश में विभिन्न संस्थाओं की ओर से बल्क परचेस में रुचि दिखाई जा रही है। जीएसटी विभाग के अलावा मेफेयर और मैट्स विश्वविद्यालय जैसी संस्थाओं की ओर से आवास खरीदना इस नीति के सकारात्मक परिणाम को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि मंडल की ओर से आवासों की बिक्री निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन ऑफर के माध्यम से की जा रही है। पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता का ध्यान रखा जा रहा है, ताकि इच्छुक व्यक्तियों और संस्थाओं को समान अवसर मिल सके।





