Kondagaon Bank Scam: बैंक में 36.79 लाख की गड़बड़ी, तत्कालीन शाखा प्रबंधक के खिलाफ 1500 पन्नों का चालान पेश

कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में बैंक ऑफ इंडिया की बड़े डोंगर शाखा में लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितता के मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW-ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने मामले में तत्कालीन शाखा प्रबंधक भावेश विश्वकर्मा के खिलाफ विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), कोंडागांव में करीब 1500 पन्नों का चालान पेश किया है। मामले में बैंक के विभिन्न खातों से कुल 36 लाख 79 हजार 323 रुपये अनधिकृत रूप से दूसरे खातों में ट्रांसफर किए जाने का आरोप है।
दूसरे अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड के इस्तेमाल का आरोप
जांच के मुताबिक, भावेश विश्वकर्मा 25 जून 2019 से 18 जनवरी 2022 तक बैंक ऑफ इंडिया की बड़े डोंगर शाखा में शाखा प्रबंधक के पद पर पदस्थ थे। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने अन्य अधिकारियों की जानकारी और सहमति के बिना उनकी यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल कर बैंकिंग सिस्टम का दुरुपयोग किया।
कई खातों से निकाली गई राशि
EOW-ACB की विवेचना में बैंक के कार्यालय खातों, फसल बीमा खातों, ग्राहकों के बचत एवं ऋण खातों और स्वयं सहायता समूहों के खातों से अनधिकृत रूप से राशि निकालकर दूसरे खातों में ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई। जांच एजेंसी के अनुसार, कुल 36,79,323 रुपये बैंक ऑफ बड़ौदा की कोंडागांव शाखा में आरोपी के व्यक्तिगत खाते सहित अन्य खातों में स्थानांतरित किए गए।
वर्ष 2022 में दर्ज हुआ था मामला
भावेश विश्वकर्मा के खिलाफ 4 अप्रैल 2022 को अपराध दर्ज किया गया था। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संशोधित धाराओं 13(1)(क) और 13(2) के साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 409 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया।
जांच के दौरान एजेंसी ने संबंधित दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण किया। जांच एजेंसी के अनुसार, अभियोजन के लिए पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद विशेष न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया है।
बैंक ने पहले ही सेवा से किया था बर्खास्त
इस मामले में बैंक ऑफ इंडिया ने भी विभागीय कार्रवाई की थी। बैंक ने 27 सितंबर 2022 को भावेश विश्वकर्मा को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। अब EOW-ACB की ओर से न्यायालय में चालान पेश किए जाने के बाद मामला आगे की न्यायिक प्रक्रिया के तहत चलेगा। आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाएगा।





