गरियाबंद में ‘हरित पैकेजिंग’ पर कार्यशाला, MSME उद्यमियों को सतत समाधान अपनाने पर दिया जोर

गरियाबंद। भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की RAMP योजना के तहत ‘हरित पैकेजिंग एवं सतत समाधान’ विषय पर 23 अक्टूबर को कृषि ऋषि आश्रम, किरगांव, विकासखंड छुरा में कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (CSIDC) ने किया, जबकि PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) ने उद्योग भागीदार के रूप में सहभागिता की।
हरित पैकेजिंग को अवसर के रूप में अपनाएं MSME
कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर एग्रोक्रेट्स सोसाइटी फॉर रूरल डेवलपमेंट के अध्यक्ष धीरेंद्र मिश्रा ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सतत पैकेजिंग अब केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि MSME क्षेत्र के लिए नए अवसर भी पैदा कर रही है। इसके जरिए उद्यम अपशिष्ट कम करने, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर सकते हैं।
जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक दीनबंधु ध्रुव ने MSME के दीर्घकालिक विकास में हरित पैकेजिंग की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास नीति 2024-30 का उल्लेख करते हुए उद्यमियों से पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग, पुनर्चक्रण योग्य सामग्री और संसाधनों के कुशल उपयोग वाली तकनीकों को अपनाने की अपील की।
RAMP योजना के तहत तकनीकी प्रस्तुति
CSIDC की SPIU टीम के प्रतिनिधि आनंद वर्धन ने RAMP योजना के तहत हरित पैकेजिंग और सतत समाधानों पर तकनीकी प्रस्तुति दी। उन्होंने पर्यावरण अनुकूल, पुनर्चक्रण योग्य और जैव-अपघटनीय पैकेजिंग विकल्पों के साथ अपशिष्ट कम करने और उत्पादन प्रक्रिया में संसाधनों के बेहतर उपयोग की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि हरित पैकेजिंग के जरिए MSME पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के साथ परिचालन लागत को अनुकूलित कर सकते हैं और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ा सकते हैं।
कृषि अपशिष्ट से तैयार होंगे नए उत्पाद
एग्रोफेब सस्टेनेबल प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं CEO डॉ. करण चंद्राकर ने हरित फाइबर और सतत समाधान विषय पर तकनीकी प्रस्तुति दी। उन्होंने कृषि अपशिष्ट से फाइबर निकालने की प्रक्रिया और उसके विभिन्न उपयोगों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि कृषि अपशिष्ट को उपयोगी उत्पादों में बदलकर किसानों के लिए आय के नए स्रोत विकसित किए जा सकते हैं। कृषि अपशिष्ट को संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने से एक ओर किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण और चक्रीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।
चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर जोर
कार्यशाला में प्लास्टिक अपशिष्ट में कमी, जैव-अपघटनीय सामग्री के इस्तेमाल, कृषि संसाधनों के प्रभावी उपयोग और पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग समाधान विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। उद्यमियों से जिम्मेदार पैकेजिंग पद्धतियां अपनाने और चक्रीय अर्थव्यवस्था के विकास में योगदान देने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में PHDCCI छत्तीसगढ़ राज्य चैप्टर के रेजिडेंट डायरेक्टर सुमित दुबे ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।





