CG Rajyotsav 2026: छत्तीसगढ़ को सुशासन में आदर्श और विकास में अग्रणी राज्य बनाना हमारा संकल्प : राज्यपाल रमेन डेका

रायपुर। छत्तीसगढ़ को सुशासन में आदर्श, अर्थव्यवस्था में सशक्त और विकास में अग्रणी राज्य बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ना है। इसके लिए प्रदेश के युवाओं, महिलाओं, किसानों, श्रमिकों और जनजातीय समाज की सामूहिक भागीदारी जरूरी है। यह बात राज्यपाल रमेन डेका ने नवा रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्योत्सव-2026 के दूसरे दिन के समारोह को संबोधित करते हुए कही।
राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने गठन के 26 वर्षों की विकास यात्रा पूरी कर ली है और अब नई जिम्मेदारियों, संभावनाओं और संकल्पों के दौर में प्रवेश कर चुका है। प्रदेश के सामूहिक प्रयास विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने राज्य स्थापना दिवस पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण का सपना देखने वाले पुरखों और पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को नमन किया।
बस्तर में शांति और विकास का नया अध्याय
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि किसी भी राज्य के विकास के लिए शांति और सुरक्षा पहली आवश्यकता है। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में शांति स्थापना और विकास के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण काम हुए हैं। कभी हिंसा और कठिन परिस्थितियों से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब सड़क, बिजली, संचार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं।
उन्होंने कहा कि बस्तर के दूरस्थ इलाकों में मोबाइल कनेक्टिविटी का विस्तार हो रहा है। स्कूल खुल रहे हैं, स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित की जा रही हैं और आजीविका मिशन के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं। राज्यपाल ने सुरक्षा बलों के साहस और बलिदान को नमन करते हुए हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों का अभिनंदन किया।
उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति और विकास के इस बदलाव को स्थायी बनाने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के अवसरों का लगातार विस्तार करना जरूरी है।
जल, जंगल और खनिज संपदा का संरक्षण जरूरी
राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध प्रदेश है। यहां की वन संपदा, नदियां, जलस्रोत और खनिज संसाधन राज्य की बड़ी ताकत हैं। विकास के साथ इनका संरक्षण भी सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने जल संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि आने वाले समय में जल प्रबंधन बड़ी चुनौती बन सकता है। इसके लिए जल संरक्षण को जनभागीदारी आधारित अभियान के रूप में आगे बढ़ाना होगा। नदियों, तालाबों और अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।
शिक्षा, तकनीक और कौशल विकास से बनेगा युवाओं का भविष्य
राज्यपाल ने कहा कि किसी भी परिवार और राज्य का भविष्य बच्चों और युवाओं पर निर्भर करता है। इसलिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक तकनीक और कौशल विकास में निवेश आवश्यक है। अबूझमाड़ और जगरगुंडा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में शैक्षिक नगर विकसित करने की योजना प्रदेश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी विद्यालय तक पहुंचना कठिन था, वहां आधुनिक शिक्षा की सुविधाएं विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सेमीकंडक्टर इकाई और AI डाटा सेंटर पार्क से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
राज्यपाल ने कहा कि औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन के प्रयास छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देंगे। नवा रायपुर में सेमीकंडक्टर इकाई और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डाटा सेंटर पार्क जैसी परियोजनाएं आधुनिक औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
उन्होंने कहा कि मुद्रा योजना, स्टार्टअप और कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रम युवाओं को उद्यमशीलता के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों के विकास से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सुरक्षा, शांति, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।
किसान, श्रमिक और जनजातीय समाज छत्तीसगढ़ की असली ताकत
राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान यहां की समृद्ध संस्कृति, मेहनतकश नागरिकों और प्राकृतिक संपदा से है। किसानों, मजदूरों और जनजातीय समाज ने अपने परिश्रम, परंपराओं और जीवन मूल्यों से प्रदेश की विशिष्ट पहचान बनाई है।
उन्होंने कहा कि विकास का उद्देश्य केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाना है। ग्रामीण क्षेत्रों, दूरस्थ अंचलों और वंचित समुदायों की विकास यात्रा में भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है।
छोटे-छोटे प्रयासों से आएगा बड़ा सामाजिक बदलाव
राज्यपाल ने प्रदेशवासियों से विकास कार्यों में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को ऐसा कोई न कोई काम करना चाहिए, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन आए। जीवन में केवल ट्रांजेक्शन नहीं, बल्कि ट्रांसफार्मेशन लाने वाले कार्यों को महत्व देना चाहिए। छोटे-छोटे सकारात्मक प्रयास मिलकर बड़े सामाजिक बदलाव का आधार बनते हैं।
राज्योत्सव हमारी लोक संस्कृति और जनजातीय परंपराओं का उत्सव : राजेश अग्रवाल
समारोह को संबोधित करते हुए संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्योत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि प्रदेश की कला, संस्कृति, लोक परंपराओं और विकास यात्रा को एक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर है। छत्तीसगढ़ की पहचान जनजातीय समाज की गौरवशाली परंपराओं, लोकजीवन, प्रकृति के साथ सामंजस्य और सांस्कृतिक विविधता से है।
उन्होंने कहा कि बस्तर से लेकर सरगुजा और मैदानी अंचलों तक हर क्षेत्र की अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है। प्रदेश की भाषाएं, बोलियां, लोकगीत, लोकनृत्य और परंपराएं इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं।
जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन पर जोर
संस्कृति मंत्री ने कहा कि राज्योत्सव में विभिन्न जिलों से आए शिल्पकारों, बुनकरों और लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने और उत्पादों को पहचान दिलाने का अवसर मिल रहा है। जनजातीय संस्कृति छत्तीसगढ़ की पहचान का आधार स्तंभ है। इन परंपराओं का उत्सव मनाने के साथ उनका संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक हस्तांतरण भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार जनजातीय समाज के सामाजिक सम्मान, आर्थिक सशक्तिकरण और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। लोक कलाकारों और पारंपरिक कलाओं को प्रोत्साहन देने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश के लोक कलाकारों को राष्ट्रपति भवन में अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने और सम्मान प्राप्त करने का अवसर मिलना गौरव की बात है।
लोक संस्कृति को पर्यटन और आजीविका से जोड़ने की पहल
राजेश अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश की लोक संस्कृति और पर्यटन को जोड़कर रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। पर्यटन के माध्यम से स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ आने वाले पर्यटक यहां की प्राकृतिक सुंदरता के साथ स्थानीय खानपान, संगीत, शिल्प और सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित हों, इसके लिए समन्वित प्रयास जरूरी हैं। आधुनिकता के दौर में स्थानीय भाषाओं, बोलियों, लोकगीतों और परंपराओं का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है।
राज्योत्सव 2026 की थीम ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’
संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने स्वागत उद्बोधन में राज्योत्सव के आयोजन और गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष राज्योत्सव की थीम ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’ रखी गई है।
उन्होंने कहा कि राज्योत्सव के माध्यम से प्रदेश की कला, साहित्य, संस्कृति, पर्यटन और जनकल्याणकारी योजनाओं को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित किया जा रहा है। विभिन्न विभागों की प्रदर्शनियों में राज्य की विकास यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य की प्राथमिकताओं की जानकारी दी जा रही है। स्थानीय कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए प्रदेश की विविध लोक परंपराओं को भी मंच मिल रहा है।
समारोह में सांसद सुनील सोनी, विधायक पुरंदर मिश्रा, मोतीलाल साहू और अनुज शर्मा सहित जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, कला एवं साहित्य जगत की विभूतियां, लोक कलाकार, मीडिया प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।





