#संपादकीय

कही-सुनी (05 APRIL-2026) : क्या छत्तीसगढ़ में 2028 का चुनाव नए परिसीमन के साथ होगा ?

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रवि भोई की कलम से

माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में 2028 का विधानसभा चुनाव नए परिसीमन के आधार पर होगा। अभी नई जनगणना होनी है और 2027 तक जनगणना का काम पूरा होगा, पर अंतिम आंकड़े आने में समय लगेगा। संकेत हैं कि 2011 की जनगणना के आधार पर विधानसभा सीटों का निर्धारण होगा। छत्तीसगढ़ में अभी 90 विधानसभा सीटें हैं। कहा जा परिसीमन के बाद सीटें 135 तक पहुँच जाएगी। चर्चा है कि केंद्र सरकार 16 अप्रैल से दो-तीन दिन का संसद सत्र बुलवाकर इस बारे में फैसला लेने वाली है, इसके बाद स्थिति साफ़ होगी। कहा जा रहा है कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले परिसीमन की खबरों ने राजनीतिक दलों के नेताओं,मंत्री-विधायकों के दिलों की धड़कन बढ़ा दी है।

सुबोध सिंह मिड करियर ट्रेनिंग में जाएंगे

कहते हैं मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह 6 से 24 अप्रैल तक मिड करियर ट्रेनिंग के लिए मसूरी जाने वाले हैं। आमतौर पर 25 साल की सेवा के बाद मिड करियर ट्रेनिंग के लिए आईएएस अफसर लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी मसूरी जाते हैं। कहा जा रहा है कि 1997 बैच के आईएएस सुबोध सिंह के मिड करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम से लौटने के बाद ही आईएएस अफसरों के तबादले होंगे। उम्मीद की जा रही है कि मंत्रालय और जिला स्तर पर आईएएस अफसरों के तबादले मई के दूसरे हफ्ते में होंगे, तब तक पांच राज्यों की चुनाव ड्यूटी में गए आईएएस अफसर भी लौट कर आ जाएंगे। माना जा रहा है कि अबकी प्रशासनिक फेरबदल में मंत्रालय स्तर पर व्यापक बदलाव होंगे। कई सचिवों के प्रभार इधर से उधर होंगे। दो साल से अधिक समय से एक ही जिले में पदस्थ कलेक्टर भी प्रभावित हो सकते हैं।

मक्सी कुजूर बनेंगे इरिगेशन ईएनसी

कहते हैं मंत्रालय में जल संसाधन विभाग के ओएसडी मक्सी कुजूर विभाग के प्रभारी ईएनसी होंगे। मक्सी कुजूर संविदा पर चल रहे ईएनसी इंद्रजीत उइके का स्थान लेंगे। वरिष्ठता सूची में मक्सी कुजूर से ऊपर महानदी रीवर प्रोजेक्ट के चीफ इंजीनियर शंकर ठाकुर हैं, पर शंकर ठाकुर दो महीने बाद रिटायर हो जाएंगे। इस कारण मक्सी कुजूर दौड़ में आगे चल रहे हैं। चीफ इंजीनियर मक्सी कुजूर करीब तीन साल तक ईएनसी रहेंगे। वैसे मक्सी कुजूर चर्चित अफसर हैं और कई मामलों में उलझ चुके हैं, पर विभाग में वरिष्ठ अफसरों की कमी का लाभ मक्सी कुजूर को मिलता दिख रहा है। बताते हैं मक्सी कुजूर जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश टोप्पो की पसंद हैं। मक्सी कुजूर की जगह मंत्रालय में जल संसाधन विभाग का ओएसडी आलोक अग्रवाल को बनाए जाने की खबर है। बताते हैं पोस्टिंग से पहले ही आलोक अग्रवाल का विरोध भी शुरू हो गया है। आलोक अग्रवाल का जल संसाधन विभाग के अधिकारी और ठेकेदार विरोध कर रहे हैं। सुना जा रहा है कि ईओडब्ल्यू की जाँच के चलते आलोक अग्रवाल का प्रमोशन लटका है। वे अभी कार्यपालन अभियंता ही हैं, जबकि उनसे कनिष्ठ अधीक्षण अभियंता प्रमोट हो गए हैं। अलोक अग्रवाल को डॉ रमन सिंह के राज में ईओडब्ल्यू द्वारा दबोचा गया था और भूपेश बघेल के राज में उनकी वापसी हो गई। विभाग के ठेकेदार और अफसर आलोक अग्रवाल को प्रोजेक्ट में पच्चड़ फ़साने वाले मानते हैं। हवा है कि मक्सी कुजूर और आलोक अग्रवाल दोनों ही एक ही ठेकेदार के शिकार हुए थे और अब दोनों नए मुकाम की दौड़ में हैं।

चुनाव और आफिस ड्यूटी साथ-साथ

कहते हैं पश्चिम बंगाल,तमिलनाडु,असम, केरल और पांडिचेरी चुनाव ड्यूटी में गए कुछ अफसर चुनाव आव्जर्वर के साथ आन लाइन फाइलें भी निपटा रहे हैं। बताते हैं सरकार ने अफसरों के छुट्टी या दूसरी ड्यूटी पर जाने की स्थिति में विभागीय कामकाज के निपटारे के लिए लिंक आफिसर की व्यवस्था की है, पर चुनाव ड्यूटी पर गए कुछ अफसर फाइलें आन लाइन ही बुलवा रहे हैं। लिंक ऑफिसर को फाइलें नहीं जा रही हैं। छत्तीसगढ़ सरकार में ई फाइल सिस्टम के चलते विभाग से मोह पालने वाले अफसरों के लिए यह सुअवसर बन गया है। चर्चा है कि राज्य से बाहर रहते कुछ अफसरों ने जाते-जाते वित्तीय वर्ष की फ़ाइल धड़ल्ले से निपटाई। बताते हैं फाइलें उनकी नजर से गुजरने से हिसाब-किताब का अंदाजा भी रहा। दूसरे राज्य में रहते विभाग की फाइलें आन लाइन निपटाने को क्या माना जाय, इसे मातहत समझ नहीं पा रहे हैं। साहब राज्य सरकार की ड्यूटी पर हैं या फिर चुनाव आयोग की ड्यूटी पर। आमतौर पर माना जाता है कि चुनाव ड्यूटी में लगे अफसर चुनाव आयोग के अधीन रहते हैं। इस बार राज्य में नया ट्रेंड सुनने को मिला।

प्रभारी एसपी का बदला जाना चर्चा में

जांजगीर-चांपा जिले के एसपी विजय पांडे के ट्रेनिंग में जाने के कारण डीजीपी के आदेश पर दो अप्रैल को छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल 11 वीं वाहिनी जांजगीर-चांपा के सेनानी बिमल कुमार बैस को पहले प्रभारी एसपी बनाया गया था, पर उसी दिन आदेश बदल कर श्री बैस की जगह छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल छठवीं वाहिनी रायगढ़ की सेनानी निवेदिता पाल को जांजगीर-चांपा का प्रभारी एसपी बना दिया। अब डीजीपी साहब ने आदेश क्यों बदला चर्चा का विषय है। श्री बैस आईपीएस हैं और निवेदिता पाल अभी राज्य पुलिस सेवा की अफसर हैं। जांजगीर-चांपा जिले के एसपी विजय पांडे के अलावा रायपुर ग्रामीण की एसपी श्वेता श्रीवास्तव,कोंडागांव के एसपी पंकज चंद्रा और गरियाबंद के एसपी वेदव्रत सिरमौर 06 अप्रैल से 15 मई तक प्रशिक्षण के लिए सरदार वल्ल्भव भाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी हैदराबाद जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल 20 वीं वाहिनी महासमुंद की सेनानी मनीषा ठाकुर रावटे रायपुर ग्रामीण की प्रभारी एसपी होंगी। एसटीएफ बघेरा जिला-दुर्ग के एसपी त्रिलोक बंसल को कोंडागांव की जिम्मेदारी दी गई है। गरियाबंद की जिम्मेदारी नीरज चंद्राकर संभालेंगे। नीरज चंद्राकर अभी पुलिस मुख्यालय में पुलिस अधीक्षक एसआईए हैं।

जल्दी मिल सकता है पर्यावरण मंडल को अध्यक्ष

कहते हैं छत्तीसगढ़ पर्यावरण मंडल के अध्यक्ष पद के लिए एक वरिष्ठ आईएफएस का नाम चल रहा है। उम्मीद की जा रही है कि जल्दी ही छत्तीसगढ़ पर्यावरण मंडल को नया अध्यक्ष मिल जाएगा। अभी पर्यावरण सचिव के नाते अंकित आनंद छत्तीसगढ़ पर्यावरण मंडल के अध्यक्ष हैं। छत्तीसगढ़ पर्यावरण मंडल में अब तक पर्यावरण सचिव को ही अध्यक्ष बनाए जाने की परंपरा रही है। अब देखते हैं यह परंपरा बदलती है या फिर चलती रहती है। पर्यावरण मंडल के अध्यक्ष की नियुक्ति में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी की पसंद मायने रखेगा। राज्य में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल महत्वपूर्ण संस्था है।

बैठक के साथ पूजा-पाठ भी

राज्य के प्रभारी डीजीपी अरुणदेव गौतम अपने सरगुजा-जशपुर दौरे में पुलिस अफसरों की बैठक लेकर कानून व्यवस्था की समीक्षा के साथ अंबिकापुर में महामाया की पूजा-अर्चना भी की। प्रभारी डीजी के रूप में एक साल से अधिक का समय गुजार चुके गौतम साहब स्थायी डीजीपी बनने की दौड़ में हैं। यूपीएससी के पैनल में नाम आने के बाद भी अरुणदेव गौतम को स्थायी डीजीपी बनने का मौका अब तक नहीं मिला है। राज्य में अब तक स्थायी डीजीपी नहीं बनाए जाने के मुद्दे पर अब यूपीएससी में पूछताछ की है , तो शायद फिर गौतम साहब की आस जगी है। अरुणदेव गौतम जुलाई 2027 में रिटायर होंगे, ऐसे में अभी उनका कार्यकाल एक साल से ज्यादा बचा है, पर स्थायी डीजीपी बन जाते हैं तो दो साल के पहले पद से नहीं हटाए जा सकेंगे।

शशि सिंह की अलग धारा

कहते हैं सूरजपुर जिला की कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह अलग लाइन खींचने में लगी हुई हैं। बताते हैं जिला कार्यकारिणी से टी एस सिंहदेव के कुछ समर्थकों के इस्तीफे बाद शशि सिंह ने धारा बदल दी है। 2024 के लोकसभा चुनाव में सरगुजा से कांग्रेस की प्रत्याशी रही शशि सिंह को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का समर्थक माना जाता है। शशि सिंह के शपथ समारोह में भूपेश बघेल की मौजूदगी और टी एस सिंहदेव की गैर हाजिरी चर्चा में रही। माना जा रहा है कि न चाहते हुए भी सिंहदेव साहब शशि सिंह का विरोध नहीं कर पा रहे हैं। एक तो सूरजपुर में उनके पास मजबूत टीम नहीं है और शशि सिंह टीम राहुल से जुडी हैं। शशि सिंह के तेवर को देखकर लोग अंदाजा लगा रहे हैं कि अब पूरे सरगुजा संभाग में टी एस सिंहदेव का दबदबा रहा नहीं।

(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
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