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सीजफायर के बाद सक्रिय हुआ भारत, ईरान से संपर्क कर होर्मुज में फंसे 16 जहाजों को निकालने की तैयारी

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में Iran और United States के बीच घोषित सीजफायर के बाद भारत ने तेजी से कूटनीतिक कदम उठाए हैं। भारत सरकार ने ईरान से संपर्क साधकर होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में फंसे अपने तेल और गैस से जुड़े 16 जहाजों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

भारत ने सीजफायर का किया स्वागत

Ministry of External Affairs India ने आधिकारिक बयान जारी कर युद्ध विराम का स्वागत किया है। बयान में कहा गया कि यह कदम पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
भारत ने एक बार फिर दोहराया कि संवाद और कूटनीति ही किसी भी संघर्ष का स्थायी समाधान है।

ऊर्जा सुरक्षा को लेकर राहत की उम्मीद

सरकारी सूत्रों के अनुसार, सीजफायर के बाद भारत की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी चिंता अब कम हो सकती है। फिलहाल होर्मुज के पास फंसे 16 जहाजों में से अधिकांश तेल और गैस से जुड़े हैं, जिनमें करीब 2 लाख टन से अधिक एलपीजी मौजूद है।

भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85% आयात करता है, जिसमें पश्चिम एशिया का योगदान करीब 60% है। ऐसे में Strait of Hormuz में किसी भी तरह की अस्थिरता देश की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर डालती है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी कूटनीतिक गतिविधियां

इसी बीच भारत के विदेश सचिव Vikram Misri अमेरिका दौरे पर हैं, जहां वे Donald Trump प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान पश्चिम एशिया की स्थिति पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

वहीं, विदेश मंत्री S. Jaishankar इस सप्ताहांत United Arab Emirates की यात्रा पर जाएंगे। यह दौरा क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा आपूर्ति को सुनिश्चित करने की भारत की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

व्यापार और आपूर्ति पर पड़ेगा असर कम

पश्चिम एशिया में तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार नेटवर्क प्रभावित हुए थे। हालांकि, सीजफायर के बाद अब जहाजों की आवाजाही सामान्य होने और ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौटने की उम्मीद जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों को राहत मिलेगी और घरेलू स्तर पर गैस व एलपीजी आपूर्ति में सुधार देखने को मिल सकता है।