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स्टार हेल्थ इंश्योरेंस के विरुद्ध उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में बड़ी सफलता, अधिवक्ता ठाकुर निश्चय सिंह ने पिता को दिलाया ₹5.57 लाख का बीमा दावा

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रायपुर। उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय में उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Consumer Disputes Redressal Commission) ने ठाकुर महेन्द्र सिंह के पक्ष में फैसला सुनाते हुए स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को अस्पताल उपचार से संबंधित ₹5,57,000 के बीमा दावे का भुगतान करने का निर्देश दिया है। साथ ही आयोग ने वाद व्यय (लीगल फीस) एवं मानसिक प्रताड़ना के लिए भी क्षतिपूर्ति प्रदान करने का आदेश दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ठाकुर महेन्द्र सिंह द्वारा अस्पताल में उपचार हेतु हुए खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए बीमा दावा प्रस्तुत किया गया था, जिसे बीमा कंपनी द्वारा अस्वीकार कर दिया गया। इसके बाद उनके पुत्र एवं अधिवक्ता ठाकुर निश्चय सिंह ने अपने पिता की ओर से उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Consumer Disputes Redressal Commission) के समक्ष परिवाद प्रस्तुत किया और मामले की प्रभावी पैरवी की।

मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों एवं तर्कों पर विचार करने के पश्चात उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Consumer Disputes Redressal Commission) ने परिवादी के पक्ष में निर्णय पारित करते हुए बीमा कंपनी को ₹5,57,000 की दावा राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया। इसके अतिरिक्त मानसिक कष्ट एवं मुकदमेबाजी में हुए व्यय के लिए भी राशि प्रदान किए जाने का आदेश दिया गया।

कानूनी क्षेत्र में अधिवक्ता ठाकुर निश्चय सिंह की यह सफलता विशेष रूप से चर्चा का विषय बनी हुई है। हाल के दिनों में उन्होंने अनेक दीवानी (सिविल) मामलों में प्रभावी पैरवी कर अपने मुवक्किलों को राहत दिलाई है। वहीं आपराधिक (क्रिमिनल) मामलों में भी उन्होंने विभिन्न पक्षकारों के लिए अनुकूल आदेश एवं राहत प्राप्त कर उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण है तथा बीमा दावों के मामलों में न्याय प्राप्त करने के इच्छुक उपभोक्ताओं के लिए एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करता है।

उल्लेखनीय है कि उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Consumer Disputes Redressal Commission) द्वारा पारित यह आदेश बीमा कंपनियों को यह संदेश देता है कि वैध एवं वास्तविक दावों को अनुचित आधार पर अस्वीकार नहीं किया जा सकता तथा उपभोक्ताओं को उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।