पत्रकारिता के पितामह पं. स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी को याद किया गया, जयंती समारोह में उनके सिद्धांतों और योगदान को किया नमन

० प्रो. जंग बहादुर पांडेय बोले— पं. त्रिवेदी ने पत्रकारिता को दिए संस्कार, आज भी उनके आदर्श हैं प्रासंगिक
रायपुर। छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता के पितामह पंडित स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी की जयंती पर प्रेस क्लब रायपुर और ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में उनके पत्रकारिता, साहित्य और सामाजिक योगदान को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई। वक्ताओं ने उन्हें सिद्धांतनिष्ठ पत्रकारिता का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनके विचार और मूल्य आज भी पत्रकारों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
समारोह के मुख्य अतिथि रांची विश्वविद्यालय के प्रो. जंग बहादुर पांडेय ने कहा कि पं. स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी ने महावीर प्रसाद द्विवेदी की सिद्धांतपरक पत्रकारिता को आत्मसात किया। यही कारण है कि आज भी छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता में संस्कार और मूल्य दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि पं. त्रिवेदी ने अपनी लेखनी से एक आदर्श छत्तीसगढ़ की कल्पना की थी और उनका साहित्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्य परिषद के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि आजादी से पहले पं. त्रिवेदी ने विकासोन्मुख पत्रकारिता की नींव रखी और अपने समय के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक परिवर्तनों के साक्षी रहे।
विशिष्ट अतिथि डॉ. शाहिद अली ने पं. त्रिवेदी के ग्रामीण पत्रकारिता और जनजागरण में योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने अनेक पत्रकारों को प्रशिक्षित कर एक संस्था का रूप ले लिया था। वरिष्ठ पत्रकार गिरीश पंकज ने कहा कि आज पत्रकारिता में जो सकारात्मक परंपराएं दिखाई देती हैं, उनमें पं. त्रिवेदी की विरासत का महत्वपूर्ण योगदान है।
प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी ने कहा कि नई पीढ़ी के पत्रकारों को पं. त्रिवेदी के लेखन और कार्यशैली से प्रेरणा लेनी चाहिए। वहीं डॉ. सुधीर शर्मा ने स्वागत भाषण में इस आयोजन को छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता के संस्कारों की निरंतरता का उत्सव बताया। डॉ. सुशील त्रिवेदी ने कहा कि पं. त्रिवेदी की विरासत का संरक्षण समाज और पत्रकारिता जगत की साझा जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर डॉ. सुधीर शर्मा द्वारा संपादित पुस्तक ‘पं. स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी : प्रतिनिधि रचनाएं’ का विमोचन भी किया गया। वक्ताओं ने बताया कि पं. त्रिवेदी ने विकास पत्रकारिता, जनसंपर्क, ग्रामीण पत्रकारिता और छत्तीसगढ़ी साहित्य के उत्थान में उल्लेखनीय योगदान दिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सीमा चंद्राकर ने किया। समारोह में इतिहासकार, साहित्यकार, वरिष्ठ पत्रकार, शिक्षाविद और बड़ी संख्या में पत्रकार एवं लेखक उपस्थित रहे।





