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15 साल बाद तैयार हुई देश की सबसे लंबी भूमिगत जल सुरंग, अब बिना पंप विंध्य तक पहुंचेगा नर्मदा का पानी

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कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी जिले के स्लीमनाबाद में बन रही देश की सबसे लंबी भूमिगत जल सुरंग का निर्माण आखिरकार पूरा हो गया है। करीब 15 वर्षों तक चली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के ब्रेकथ्रू के साथ अब पहली बार बरगी बांध का पानी बिना किसी पंप या लिफ्ट के सीधे विंध्य क्षेत्र तक पहुंचेगा। इसे विंध्य की सिंचाई व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव लाने वाली परियोजना माना जा रहा है।

15 साल का संघर्ष, कई चुनौतियों के बाद मिली सफलता

नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) की इस परियोजना को वर्ष 2008 में मंजूरी मिली थी और 2011 में निर्माण कार्य शुरू हुआ। करीब 30 मीटर गहराई में जर्मनी की अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) की मदद से 11.952 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई गई।

निर्माण के दौरान इंजीनियरों को ऊंचे भूजल स्तर, सिंकहोल, कोरोना महामारी और रास्ते में आई 56 कठोर चट्टानों जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कई बार मशीन के कटर और अन्य पुर्जे बदलने पड़े। सुरक्षा के लिए सुरंग के ऊपर लगभग 20 मीटर चौड़ी भूमि का अस्थायी अधिग्रहण भी किया गया।इन चुनौतियों के चलते परियोजना की लागत 799 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 1,442 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को मिलेगा लाभ

परियोजना पूरी होने के बाद कटनी जिले की 21,823 हेक्टेयर कृषि भूमि को पहली बार नर्मदा के पानी से नियमित सिंचाई मिलेगी। इसके अलावा जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, पन्ना और रीवा के 1,450 गांवों की करीब 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि भी इस योजना से लाभान्वित होगी।

मुख्य सुरंग के साथ करीब 12 किलोमीटर लंबी ओपन कैनाल और एक किलोमीटर लंबी कट-एंड-कवर संरचना भी तैयार की गई है। परीक्षण और तकनीकी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अक्टूबर 2026 से सुरंग के जरिए सिंचाई और जलापूर्ति शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव कर सकते हैं निरीक्षण

टनल के ब्रेकथ्रू के बाद 17 जुलाई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्लीमनाबाद दौरे की संभावना है। प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत वे टनल का निरीक्षण कर सकते हैं और परियोजना से जुड़े इंजीनियरों व कर्मचारियों का सम्मान भी किया जा सकता है। हालांकि, दौरे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

कटनी कलेक्टर ने दी जानकारी

कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी ने बताया कि सुरंग की खुदाई पूरी हो चुकी है, लेकिन रेल लाइन और बिजली से जुड़े कुछ कार्य अभी बाकी हैं, जिन्हें पूरा होने में करीब डेढ़ माह का समय लगेगा। इसके बाद बरगी बांध से पानी छोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना विंध्य क्षेत्र के किसानों की तस्वीर बदलने के साथ-साथ भूमिगत जल सुरंग निर्माण का एक उत्कृष्ट इंजीनियरिंग मॉडल भी साबित होगी।