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आत्म-नियंत्रण से ही जागृत होती है अंतःशक्ति, यही जीवन का मूल मंत्र : प्रो. डॉ. मनोज दयाल

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० केटीयूजेएम और ब्रह्माकुमारी संस्थान की संयुक्त कार्यशाला में विद्यार्थियों को सकारात्मक चिंतन, मेडिटेशन और व्यक्तित्व विकास का दिया संदेश

रायपुर। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (केटीयूजेएम) और प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को “आत्म-नियंत्रण से अंतःशक्ति का जागरण” विषय पर प्रेरणादायी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को आत्म-नियंत्रण, सकारात्मक सोच, मानसिक संतुलन और मेडिटेशन के माध्यम से व्यक्तित्व विकास का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. मनोज दयाल ने कहा कि आज के दौर में तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच आत्म-नियंत्रण ही व्यक्ति की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता शिक्षा का उद्देश्य केवल पेशेवर कौशल देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में चरित्र, संस्कार और मानवीय मूल्यों का विकास करना भी है।

उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान आत्मिक शक्ति के विकास के लिए संकल्पों, वाणी तथा समय और आदतों पर नियंत्रण के तीन सरल सूत्र देता है। भविष्य के मीडिया कर्मियों को फेक न्यूज, टीआरपी की प्रतिस्पर्धा, नकारात्मकता और अहंकार जैसी चुनौतियों का सामना करना होगा, जिनसे आत्म-नियंत्रण और सकारात्मक सोच के माध्यम से ही पार पाया जा सकता है।

मुख्य वक्ता ब्रह्मकुमारी ज्योति दीदी ने कहा कि क्रोध का सबसे बड़ा कारण दूसरों से अत्यधिक अपेक्षाएं रखना है। यदि व्यक्ति हर परिस्थिति में स्वयं से पूछे कि “क्रोध करने से मुझे क्या लाभ होगा”, तो मन स्वतः शांत होने लगता है। उन्होंने नियमित रूप से सकारात्मक संकल्प दोहराने और अवचेतन मन को सकारात्मक ऊर्जा से भरने पर जोर दिया।

ब्रह्मकुमारी भावना दीदी ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के लिए मेडिटेशन तनावमुक्त और संतुलित जीवन का प्रभावी माध्यम है, जबकि ब्रह्मकुमारी तारिका दीदी ने कहा कि सकारात्मक सोच व्यक्ति के व्यक्तित्व और आभामंडल का निर्माण करती है तथा जीवन की अनेक समस्याओं का समाधान इसी में निहित है।

कार्यक्रम में कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा ने मेडिटेशन को मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताया। कार्यशाला का संचालन डॉ. चैताली पाण्डेय ने किया, अतिथियों का परिचय डॉ. नीति ताम्रकार ने कराया तथा आभार डॉ. नृपेन्द्र शर्मा ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।