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50,228 मामलों का निपटारा कर विदा हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा, बोले- न्यायिक संस्थाओं की साख सबसे अहम

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा 4 सितंबर को अपने पद से सेवानिवृत्त हो गए। उनके सम्मान में शुक्रवार को आयोजित विदाई समारोह में माहौल भावुक हो गया। अपने संबोधन में उन्होंने न्यायपालिका की भूमिका, संस्थाओं की गरिमा और परिवार के सहयोग को याद किया।

‘अदालत आम आदमी की उम्मीद का मंदिर’

विदाई समारोह में चीफ जस्टिस सिन्हा ने कहा कि अदालतें केवल ईंट-पत्थर की इमारतें नहीं हैं, बल्कि आम आदमी की उम्मीद और न्याय का पवित्र मंदिर हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति और पद अस्थायी हो सकते हैं, लेकिन न्यायिक संस्थाएं स्थायी होती हैं।उन्होंने न्यायपालिका की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और साख को बनाए रखने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।

पत्नी को दिया अपनी सफलता का श्रेय

अपने संबोधन के दौरान जस्टिस रमेश सिन्हा ने अपनी पत्नी शालिनी सिन्हा का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि परिवार का प्यार, समझदारी और त्याग उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा। परिवार से मिले सहयोग ने उन्हें हर चुनौती का सामना करने का हौसला दिया।

3 साल से ज्यादा के कार्यकाल में 50 हजार से अधिक केस निपटाए

रमेश सिन्हा ने 29 मार्च 2023 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली थी। करीब साढ़े तीन साल के कार्यकाल के बाद उन्होंने 4 सितंबर 2026 को सेवानिवृत्ति ली।

उनके कार्यकाल में कुल 50,228 मामलों का निपटारा किया गया। इनमें 369 से अधिक ऐसे फैसले भी शामिल रहे, जिन्हें नजीर बनने वाले निर्णय के रूप में दर्ज किया गया।

विदाई के साथ न्यायपालिका के लिए संदेश

चीफ जस्टिस सिन्हा ने अपने अंतिम संबोधन में न्यायिक संस्थाओं को व्यक्ति से ऊपर बताते हुए उनकी गरिमा और भरोसे को कायम रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के प्रति आम लोगों का विश्वास ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।