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National Teacher Award 2026: गांव की कक्षा से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचीं सुनीता यादव, नवाचार से बदली ग्रामीण बच्चों की पढ़ाई

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के एक ग्रामीण स्कूल की कक्षा से शुरू हुआ शिक्षिका सुनीता यादव का सफर अब राष्ट्रीय सम्मान तक पहुंच गया है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों को पढ़ाने वाली सुनीता यादव को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया गया है। शिक्षक दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।

सुनीता यादव इस वर्ष छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुनी गई शिक्षिका हैं। देशभर से चयनित 48 स्कूली शिक्षकों में उनका नाम शामिल है। सम्मान पाने वाले शिक्षकों में 22 महिलाएं और 26 पुरुष हैं।

CM साय ने दी बधाई

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुनीता यादव को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिलने पर बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में रहकर बच्चों की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए सुनीता यादव का समर्पण और नवाचार पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है।

मुख्यमंत्री ने उनके प्रयासों को प्रदेश के दूसरे शिक्षकों के लिए भी प्रेरणादायी बताया।

2008 से शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय

सुनीता यादव वर्ष 2008 से शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ग्रामीण स्कूल में संसाधनों की कमी को उन्होंने बच्चों की पढ़ाई में बाधा बनने नहीं दिया। उन्होंने अपने स्तर पर संसाधन जुटाए और गांव के लोगों को स्कूल से जोड़कर स्मार्ट क्लास विकसित की।

अब उनकी कक्षा में प्रोजेक्टर, लैपटॉप, टैबलेट और मोबाइल आधारित ICT साधनों के जरिए पढ़ाई होती है। बच्चे सिर्फ किताबों से नहीं, बल्कि तस्वीरों, वीडियो और डिजिटल सामग्री के माध्यम से भी विषयों को समझते हैं।

उनकी शिक्षण पद्धति का मूल मंत्र है कि बच्चों को पढ़ाई रटनी नहीं, बल्कि समझनी चाहिए।

कहानी और डिजिटल तकनीक से आसान हुई पढ़ाई

सुनीता यादव ने डिजिटल कंटेंट के साथ कहानी, ऑडियो-वीडियो और गतिविधि आधारित शिक्षण को कक्षा का हिस्सा बनाया। मुश्किल विषयों को बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर समझाने पर जोर दिया गया।

इससे बच्चों के लिए पढ़ाई को आसान और रुचिकर बनाने की कोशिश की गई। कमजोर विद्यार्थियों को भी साथ लेकर चलने पर विशेष ध्यान दिया गया।

‘न्योता भोजन’ से गांव को स्कूल से जोड़ा

सुनीता यादव की पहल सिर्फ कक्षा तक सीमित नहीं रही। उन्होंने बच्चों के पोषण और स्कूल से समाज के जुड़ाव को भी मजबूत किया।

‘न्योता भोजन’ जैसी पहल के जरिए गांव के लोगों को बच्चों के साथ भोजन साझा करने के लिए जोड़ा गया। इसके माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बच्चों की शिक्षा और विकास केवल स्कूल की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरा समाज इसमें भागीदार बन सकता है।

‘घर-घर पुस्तक वाचन’ से किताबों से जुड़ा बचपन

बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए ‘घर-घर पुस्तक वाचन’ जैसी गतिविधियां शुरू की गईं। इसका उद्देश्य बच्चों को सिर्फ पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय कहानी और किताबों की दुनिया से जोड़ना था।

इस पहल का असर बच्चों की भाषा, पढ़ने की क्षमता और आत्मविश्वास में देखने को मिला।

FLN में भी मिली बड़ी उपलब्धि

सुनीता यादव के प्रयासों से विद्यालय में Foundational Literacy and Numeracy (FLN) पर भी विशेष काम हुआ। इन प्रयासों के चलते विद्यालय को ‘सुघ्घर पढ़इया’ प्लेटिनम ग्रेड की उपलब्धि मिली।

गांव के स्कूल में सीमित संसाधनों के बीच शुरू हुई पहल का राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना सुनीता यादव के लिए बड़ी उपलब्धि है। राष्ट्रपति के हाथों मिला सम्मान न सिर्फ उनके समर्पण की पहचान है, बल्कि ग्रामीण शिक्षा में नवाचार और जनभागीदारी की ताकत को भी सामने लाता है।