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सुप्रीम कोर्ट से कांग्रेस को बड़ा झटका: मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज, राज्यसभा नामांकन विवाद पर हस्तक्षेप से इनकार

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नई दिल्ली। राज्यसभा चुनाव के बीच कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने उनके नामांकन पत्र को रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता और ऐसे मामलों में कानूनी उपाय चुनाव याचिका के जरिए ही उपलब्ध है।

सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में जोरदार पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि जिस निजी शिकायत के आधार पर नटराजन का नामांकन खारिज किया गया, उस पर किसी सक्षम अदालत ने अब तक संज्ञान नहीं लिया है और न ही आरोप तय किए गए हैं। ऐसे में केवल शिकायत के आधार पर नामांकन निरस्त करना कानून की भावना के विपरीत है।

सिंघवी ने अदालत को बताया कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33ए के तहत उम्मीदवार को केवल उन्हीं आपराधिक मामलों का खुलासा करना होता है, जिनमें सक्षम अदालत द्वारा आरोप तय किए जा चुके हों। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित मामले में अभी केवल नोटिस जारी हुआ है, जबकि कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।

 

वहीं भाजपा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह मामला किसी मौलिक अधिकार के उल्लंघन से जुड़ा नहीं है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 329 का हवाला देते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान न्यायालय हस्तक्षेप नहीं कर सकता। अगर किसी उम्मीदवार का नामांकन गलत तरीके से भी खारिज हुआ हो, तो उसका समाधान चुनाव याचिका के माध्यम से ही किया जा सकता है।

चुनावी प्रक्रिया के बीच न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाएं स्पष्ट हैं
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पी.के. मिश्रा की पीठ ने भी संकेत दिए कि चुनावी प्रक्रिया के बीच न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाएं स्पष्ट हैं। अदालत ने कहा कि यदि ऐसे मामलों में सीधे हस्तक्षेप किया गया तो चुनावी विवादों के निपटारे की स्थापित व्यवस्था प्रभावित होगी।

फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम और चुनाव नियमों के तहत उम्मीदवारों को हलफनामे में आवश्यक जानकारियां देना अनिवार्य है। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नामांकन निरस्तीकरण जैसे मामलों में सीधे हस्तक्षेप करने की परंपरा को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

क्या है मामला
दरअसल, भाजपा ने आरोप लगाया था कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन पत्र के साथ दाखिल हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित मामले का उल्लेख नहीं किया था। इसी आपत्ति के आधार पर रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन रद्द कर दिया था। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अब शीर्ष अदालत के फैसले के बाद उनके लिए चुनाव याचिका का रास्ता ही खुला रह गया है।