नगरपालिका भर्ती घोटाले में टीएमसी विधायक पर ईडी का शिकंजा, मदन मित्रा के 7 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के चर्चित नगरपालिका भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायक मदन मित्रा और उनसे जुड़े सात ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े इस मामले में ईडी कथित अवैध नियुक्तियों और रिश्वतखोरी के नेटवर्क की जांच कर रही है।
ईडी के अनुसार, विभिन्न नगर पालिकाओं में नौकरी दिलाने के नाम पर अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्तियां कराई गईं और इसके बदले नकदी व सोने के रूप में रिश्वत ली गई। जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरे मामले में बिचौलियों के जरिए बड़े पैमाने पर लेन-देन हुआ।
125 संदिग्ध नियुक्तियों से जुड़ सकता है मामला
जांच एजेंसी के मुताबिक, उत्तर 24 परगना जिले की कामरहाटी विधानसभा सीट से विधायक मदन मित्रा का नाम करीब 125 कथित अवैध नियुक्तियों से जुड़े मामले में सामने आया है। ईडी फिलहाल वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच कर रही है।
स्कूल भर्ती घोटाले से खुली नई परत
नगरपालिका भर्ती घोटाले का सुराग ईडी को पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित स्कूल भर्ती घोटाले की जांच के दौरान मिला था। एजेंसी जब तृणमूल कांग्रेस से जुड़े प्रमोटर अयान शील के ठिकानों पर छापेमारी कर रही थी, तब कई अहम दस्तावेज और जानकारियां सामने आईं। इसके बाद नगरपालिका भर्ती में कथित भ्रष्टाचार की जांच शुरू की गई।
कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भी इस मामले में समानांतर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान कई प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं और पदाधिकारियों के नाम सामने आने का दावा किया गया है।
छापेमारी से पहले राजनीतिक हलचल
ईडी की कार्रवाई से ठीक एक दिन पहले मदन मित्रा ने कामरहाटी नगर पालिका के तृणमूल पार्षदों को इस्तीफा देने का निर्देश दिया था। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से विरोध प्रदर्शन करने की भी अपील की थी।
यह कदम तब सामने आया जब नगर पालिका के चेयरमैन गोपाल साहा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद मदन मित्रा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आरोप लगाया कि गोपाल साहा को लगातार अपमानित और नजरअंदाज किया जा रहा था, जिसके चलते उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
राजनीति में बढ़ी हलचल
ईडी की इस कार्रवाई को पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। फिलहाल एजेंसी ने छापेमारी में बरामद सामग्री या आगे की कार्रवाई को लेकर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन जांच का दायरा लगातार बढ़ता नजर आ रहा है।




