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G7 में मोदी-ट्रंप मुलाकात पर दुनिया की नजर, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया संकट पर होगी अहम चर्चा

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कनाडा। जी7 शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच आज द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। इस बहुप्रतीक्षित मुलाकात में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, ऊर्जा सुरक्षा, पश्चिम एशिया की स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

अंतिम चरण में भारत-अमेरिका व्यापार समझौता

सूत्रों के अनुसार भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है। करीब एक वर्ष तक चली वार्ताओं के बाद दोनों देशों ने फरवरी में अंतरिम व्यापार समझौता किया था। अब आने वाले कुछ सप्ताह में व्यापक समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

व्हाइट हाउस ने भी संकेत दिए हैं कि मोदी-ट्रंप बैठक में आर्थिक सहयोग और व्यापारिक संबंधों को नई गति देने पर विशेष जोर रहेगा।

ऊर्जा सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य पर फोकस

बैठक ऐसे समय हो रही है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती अस्थिरता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। दुनिया के तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।

भारत और अमेरिका दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी को मजबूत करने के इच्छुक हैं। ऐसे में अमेरिका से ऊर्जा आयात बढ़ाने और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

G7 मंच से मोदी ने जताई चिंता

जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित “नए साझेदारी संबंधों का निर्माण और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता की पुनर्बहाली” विषयक सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाले समुद्री व्यापार में व्यवधान पर चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन हालिया संघर्षों के कारण क्षेत्र में जान-माल का नुकसान हुआ है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।

भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया

प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक समुद्री व्यापार से जुड़े नाविकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समुद्री मार्गों को सुरक्षित बनाए रखना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है और नाविकों को बिना किसी भय के अपना दायित्व निभाने का अवसर मिलना चाहिए।

संवाद और कूटनीति पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक संघर्षों का स्थायी समाधान केवल संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से ही संभव है। भारत समुद्री मार्गों की सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

G7 में भारत की लगातार मजबूत मौजूदगी

भारत इस बार साझेदार देश के रूप में जी7 शिखर सम्मेलन में शामिल हुआ है। यह जी7 की आउटरीच प्रक्रिया में भारत की 13वीं भागीदारी है, जो वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका और प्रभाव को दर्शाती है।

मोदी-ट्रंप की संभावित मुलाकात को भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं।