#संपादकीय

कही-सुनी (21JUNE-26) : छत्तीसगढ़ में सत्ता और संगठन में बदलाव की कवायद

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रवि भोई की कलम से

कहते हैं 18 जून को मुख्यमंत्री निवास पर मंत्रियों की देर रात तक चली बैठक सत्ता और संगठन में बदलाव की कवायद का हिस्सा थी। राज्य में विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनने के बाद पहली बार मंत्रियों को इमरजेंसी मीटिंग के लिए बुलाया गया। मंत्रीगण कार्यक्रम छोड़कर आनन-फानन रायपुर पहुंचे। बताया जाता है कि करीब डेढ़ बजे तक चली बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय,क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने पहले मंत्रियों से वन-टू-वन चर्चा की और उनकी खामियां-कमियां गिनाई। कार्यशैली में सुधार की हिदायत भी दी। एक मंत्री पर अपने पद के दुरुपयोग के भी आरोप लगे। इसके बाद मंत्रियों की सामूहिक बैठक ली। माना जा रहा है कि बैठक में प्रदेश कानून-व्यवस्था की चिंताजनक स्थिति पर चर्चा की गई। सुनने में आ रहा है कि मंत्रियों की बैठक में सुशासन तिहार की रिपोर्ट और इंटेलिजेंस इनपुट भी रखा गया। कैबिनेट की बैठक के चार-पांच दिन पहले मंत्रियों की आपात बैठक के बाद साय मंत्रिमंडल में फेरबदल की सुगबुगाहट शुरू हो गई है, दूसरी तरफ मंत्रियों को ट्रेनिंग देने की भी बात हो रही है। मंत्रियों को एक बार पहले भी आईआईएम रायपुर में ट्रेनिंग दी जा चुकी है। माना जा रहा है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम बनने के बाद छत्तीसगढ़ में सत्ता और संगठन दोनों में बदलाव होगा। मंत्रियों के विभागों में भी भारी उलट-पुलट हो सकता है। चर्चा है कि उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा नितिन नबीन की टीम में महामंत्री बन सकते हैं। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव को सामान्य वर्ग के कोटे से मंत्री बनाया जा सकता है। विष्णुदेव साय मंत्रिमंडल में अभी मुख्यमंत्री समेत 14 मंत्री हैं। इसमें सामान्य वर्ग से अभी दो मंत्री विजय शर्मा और राजेश अग्रवाल हैं। मुख्यमंत्री समेत तीन ट्राइबल मंत्री हैं। अनुसूचित जाति वर्ग से दो मंत्री और सात मंत्री अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं। सरगुजा संभाग से चार मंत्री हैं। बस्तर से मंत्री केवल केदार कश्यप ही हैं। प्रदेश अध्यक्ष के लिए सामान्य वर्ग के किरण सिंह देव की जगह अन्य पिछड़ा वर्ग के तोखन साहू का नाम चर्चा में है। तोखन साहू अभी मोदी मंत्रिमडल में राज्य मंत्री हैं। अब तोखन साहू को राज्य मंत्री के साथ प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलती है या छोड़नी पड़ती है। यह बड़ा सवाल है। उत्तरप्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी के पास केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री का प्रभार है। वैसे जब डॉ रमन सिंह को 2002 में छत्तीसगढ़ भाजपा अध्यक्ष बनाया गया था,तब उन्हें केंद्रीय राज्य मंत्री नहीं रखा गया था। तोखन साहू की जगह रूपकुमारी चौधरी को केंद्र में राज्य मंत्री बनाए जाने की चर्चा चल पड़ी है।

ऋचा शर्मा के केंद्र में जाने के संकेत

1994 बैच की आईएएस और पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा के केंद्र सरकार में जाने के संकेत हैं। ऋचा शर्मा राज्य में भाजपा की सरकार आने के बाद ही दिल्ली से छत्तीसगढ़ लौटी थी। खबरें आ रही हैं कि वे फिर दिल्ली जा सकती हैं। राज्य में वर्तमान में 1994 बैच के तीन अधिकारी हैं। 1994 बैच के अधिकारी विकासशील मुख्य सचिव हैं। 1994 बैच के आईएएस अफसर मनोज पिंगुआ वन विभाग के अपर मुख्य सचिव हैं। पहले मनोज पिंगुआ भी केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले थे। बताते हैं अब उन्होंने एक साल के लिए स्थगित कर दिया है। छत्तीसगढ़ कैडर के 1994 बैच की आईएएस अधिकारी निधि छिब्बर अभी भारत सरकार में प्रतिनियुक्ति पर हैं।

राहुल छत्तीसगढ़ कांग्रेस में कितना जान फूंक पाएंगे

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के कर्ताधर्ता राहुल गांधी 21 जून को एक दिन के छत्तीसगढ़ दौरे पर आ रहे हैं। राहुल गांधी निर्वाचित जिलाध्यक्षों से रूबरू होंगे, उनको प्रशिक्षण देंगे। पर सवाल है कि राहुल गांधी के आगमन से छत्तीसगढ़ के कांग्रेसी नेता कितना सुर-ताल मिला पाएंगे। जिलाध्यक्षों को ट्रेनिंग के बहाने राहुल गांधी 2028 के लिए कांग्रेस की जमीन तैयार करने आ रहे हैं। राज्य में कई ज्वलंत मुद्दे होने के बावजूद कांग्रेस अब तक सरकार को ‘नाको चने’ नहीं चबवा पाई है। प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव राज्य कांग्रेस के अग्रिम पंक्ति के नेता हैं। इन नेताओं के बयानों में एक -दूसरे पर मिठास घोलने के बजाय कड़वाहट ज्यादा नजर आती है। 2028 की बाजी जीतने और भाजपा को मात देने के लिए नेताओं को कंधे से कंधे मिलाना होगा और जमीन पर आक्रामक लड़ाई लड़नी होगी। अब देखना होगा राहुल गांधी क्या मंत्र फूंकते हैं?

कारोबारी ने हड़पे आईपीएस के पैसे

चर्चा है कि राज्य के एक सीनियर आईपीएस के पैसे रायपुर के बड़े कारोबारी ने दबा दिए हैं। कहते हैं पैसे की वापसी के लिए मध्यस्थ के जरिये आईपीएस और कारोबारी के बीच बातचीत चल रही है। सीनियर आईपीएस कांग्रेस के भूपेश बघेल सरकार में मलाईदार पदों पर रहे। वैसे यह अफसर कई जिलों में एसपी और कई पदों पर अपनी सेवा दे चुके हैं। कहते हैं अफसर ने कारोबारी को पैसा बाजार में चलाने के लिए दिए थे। आईपीएस मलाईदार पदों से हटे तो कारोबारी ने आँख दिखाना शुरू कर दिया।

मंत्री जी का पैंतरा

कहते हैं ऊँची कुर्सी पर बैठे व्यक्ति की चाल की तोड़ निकाल पाना कठिन होता है। जीत तो हमेशा ऊँची कुर्सी वाले की ही होती है। बताते हैं राज्य के मंत्री जी के आदेश पर उनके विभाग के एक अधिकारी का ट्रांसफर हो गया। अधिकारी हाईकोर्ट जाकर स्टे आर्डर ले आया। स्टे आर्डर पर अमल करने की जगह अफसर को उल्टे सजा दे दी गई। कहा जा रहा है अधिकारी को निलंबित कर दिया गया। अफसर ने दुहाई दी, तो मंत्री जी का दिल कुछ पसीजा , पर चढ़ावा पर बात अटक गई। अफसर की बहाली के लिए बाजार में 15 पेटी का हल्ला है।

कानून-व्यवस्था बेपटरी

छत्तीसगढ़ को कभी शांति का टापू कहा जाता था। राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ का विकास हुआ, आबादी बढ़ी तो अपराध सैलाब भी बहने लग गया। अब तक हत्या,चाकूबाजी, डकैती और चोरी की घटनाएं सामने आती थी। किसी व्यक्ति को गाड़ी में बंदकर जिंदा जलाने की घटना की कल्पना तो छत्तीसगढ़ में नहीं की जा सकती थी। वह भी भाजपा के राज में भाजपा के नेता के साथ। एक जमाना था जब छत्तीसगढ़ में शराब माफिया की बात होती थी। सरकार ने शराब बेचना शुरू किया, तो शराब लॉबी ही खत्म हो गई। अब रेत के लिए लड़ाई हो रही है। नदी-नालों में मुफ्त में मिलने वाला रेत जानलेवा बन गया है। रेत में मुनाफा काटने के चक्कर में लोगों के आंसू निकल रहे हैं तो राज्य की छवि भी तार-तार हो रही है। उम्मीद है कोरिया जिले की घटना के बाद सरकार कुछ बदलाव करेगी।

(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
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