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राम मंदिर में 22 जुलाई के बाद बदलेंगी व्यवस्थाएं, दर्शन से लेकर पूजा-पद्धति तक होंगे बड़े बदलाव

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अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट 22 जुलाई के बाद राम मंदिर की व्यवस्थाओं में व्यापक बदलाव लागू करने की तैयारी में है। श्रद्धालुओं की सुविधा, दर्शन व्यवस्था, पूजा-पद्धति, राग-भोग और प्रशासनिक प्रणाली को अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए ट्रस्ट नए सिरे से मंथन कर रहा है। इसके लिए अयोध्या के संतों और रामानंदीय परंपरा के विद्वानों के सुझाव भी शामिल किए जा रहे हैं।

22 जुलाई की बैठक में लग सकती है अंतिम मुहर

सूत्रों के अनुसार, 22 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक में नई व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा सकता है। बैठक में ट्रस्ट के नए महासचिव के चयन के साथ रिक्त पदों पर नए सदस्यों की नियुक्ति भी होने की संभावना है। हाल के घटनाक्रमों के बाद ट्रस्ट मंदिर की कार्यप्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

दर्शन, चढ़ावा और प्रशासनिक व्यवस्था होगी अधिक पारदर्शी

ट्रस्ट दर्शन व्यवस्था को अधिक सुगम बनाने, चढ़ावा प्रबंधन में पारदर्शिता लाने और मंदिर की प्रशासनिक प्रणाली को अधिक जवाबदेह एवं आधुनिक बनाने पर विचार कर रहा है। इसके अलावा सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, सेवा व्यवस्था और श्रद्धालुओं को मिलने वाली सुविधाओं में भी आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

रामानंदीय परंपरा के अनुरूप होगी पूजा-पद्धति

राम मंदिर की पूजा-पद्धति को रामानंदीय परंपरा के अनुरूप व्यवस्थित करने की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। इसी क्रम में विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक दिनेश चंद्र ने निर्मोही अखाड़ा के महंत एवं राम मंदिर ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास से मुलाकात कर पूजा-विधि को लेकर विस्तृत सुझाव लिए।

महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि राम मंदिर में पूजा पूरी तरह शास्त्रीय विधि-विधान और रामानंदीय परंपरा के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने पूजा-पद्धति को लेकर अपने सुझाव भी ट्रस्ट के समक्ष रखे हैं।

संतों के सुझावों पर होगा अमल

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी ने संकेत दिए हैं कि संत समाज के सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। उनका कहना है कि इन सुझावों के आधार पर मंदिर की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया जाएगा, ताकि राम मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं के लिए अनुशासित, आदर्श और पारदर्शी व्यवस्था का मॉडल बन सके।