महानदी जल विवाद सुलझाने की पहल तेज : केंद्र की मध्यस्थता पर बनी सहमति,दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक से निकलेगा समाधान

० किसानों और सिंचाई व्यवस्था को मिल सकती है राहत
रायपुर। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से जारी महानदी जल विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। केंद्र सरकार की मध्यस्थता पर दोनों राज्यों ने सहमति जताई है। अब विवाद का स्थायी और न्यायसंगत समाधान निकालने के लिए दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक प्रस्तावित है।
भाजपा सांसद रूपकुमारी चौधरी ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के प्रयासों से दोनों राज्यों के बीच संवाद का रास्ता खुला है। उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू की पहल की सराहना करते हुए कहा कि केंद्रीय जल आयोग के माध्यम से संयुक्त समिति के गठन की दिशा में हुई पहल सकारात्मक परिणाम लेकर आएगी।
उन्होंने कहा कि महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल के समक्ष भी दोनों राज्यों ने आपसी बातचीत से समाधान निकालने की इच्छा जताई है। सांसद ने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी के बीच होने वाली बैठक से वर्षों पुराने इस विवाद का स्थायी समाधान संभव होगा।
1980 के दशक से जारी है विवाद
महानदी जल बंटवारे को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच विवाद कई दशकों पुराना है। ओडिशा का आरोप है कि छत्तीसगढ़ में बनाए गए बैराजों और जल परियोजनाओं से हीराकुंड बांध में पानी की आवक प्रभावित हुई है। वहीं, छत्तीसगढ़ का कहना है कि वह अपने हिस्से के जल का उपयोग सिंचाई, कृषि और पेयजल आवश्यकताओं के लिए कर रहा है।
किसानों और दोनों राज्यों को मिलेगी राहत
यदि दोनों राज्यों के बीच सहमति बनती है, तो इससे सिंचाई, पेयजल और जल प्रबंधन से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों का समाधान संभव होगा। साथ ही दोनों राज्यों के किसानों और आम लोगों को भी इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।




