अर्थशास्त्र अध्ययनशाला में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए इंडक्शन कार्यक्रम, अनुशासन और निरंतर प्रयास का दिया संदेश

रायपुर। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र अध्ययनशाला में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के स्वागत और उन्हें विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था से परिचित कराने के उद्देश्य से इंडक्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारियों, विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ प्राध्यापकों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रो. ए.के. श्रीवास्तव और विशिष्ट अतिथि प्रो. राजीव चौधरी, डीन छात्र कल्याण (DSW) रहे। अतिथियों ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उनके उज्ज्वल शैक्षणिक एवं व्यावसायिक भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
उच्च शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं
मुख्य अतिथि प्रो. ए.के. श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, व्यक्तित्व, विचार और दृष्टिकोण के विकास का महत्वपूर्ण चरण है। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, समयबद्धता और सकारात्मक सोच को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने विद्यार्थियों को नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों को आत्मसात करते हुए निरंतर सीखने और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
सफलता के लिए अनुशासन और निरंतर प्रयास जरूरी
विशिष्ट अतिथि प्रो. राजीव चौधरी ने कहा कि सफलता के लिए अनुशासन, निरंतर प्रयास और सकारात्मक सोच बेहद जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय की गरिमा और शैक्षणिक अनुशासन बनाए रखने के साथ अपने लक्ष्यों की दिशा में लगातार प्रयास करने की अपील की। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया।
विभागाध्यक्ष बोले- अनुशासन ही सफलता की कुंजी
अर्थशास्त्र अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. सोनेकर ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि “अनुशासन ही सफलता की कुंजी है।” उन्होंने विद्यार्थियों को समय का सदुपयोग करने, नियमित अध्ययन करने और निरंतर सीखने की आदत विकसित करने की सलाह दी।
उन्होंने विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय के नियमों और शैक्षणिक मर्यादाओं का पालन करते हुए अध्ययन के साथ सह-शैक्षणिक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया।
विद्यार्थी परिषद का भी हुआ गठन
कार्यक्रम के दौरान विभागीय विद्यार्थी परिषद का गठन भी किया गया। विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से तृतीय सेमेस्टर के दो और प्रथम सेमेस्टर के दो विद्यार्थियों का चयन किया गया। चयनित विद्यार्थियों को परिषद के विभिन्न दायित्व सौंपे गए।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. आर.के. ब्रह्मे के स्वागत उद्बोधन से हुई। इस अवसर पर डॉ. अर्चना सेठी, डॉ. सुनील कुमार कुमेटी, डॉ. कपिल चंद्रा, डॉ. प्रगति राजकमल रॉय सहित अध्ययनशाला के अन्य प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।





