पत्रकारों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय कानून बनाए सरकार : आईजेयू 2 अक्टूबर को पत्रकार मांग दिवस मनाएगी

बेंगलुरु। देशभर में पत्रकारों और मीडिया संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन’ (IJU) ने मजबूत और व्यापक राष्ट्रीय कानून बनाने की पुरजोर मांग की है। यह मांग बेंगलुरु में आयोजित आईजेयू की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उठाई गई, जिसकी अध्यक्षता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बलविंदर सिंह जम्मू ने की।
बैठक में प्रस्ताव पेश करते हुए आईजेयू के पूर्व अध्यक्ष और तेलंगाना मीडिया अकादमी के अध्यक्ष के. श्रीनिवास रेड्डी ने पत्रकारों पर बढ़ते हमलों, कानूनी कार्यवाहियों और धमकियों पर गहरा प्रतिरोध जताया। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार के बावजूद प्रभावी कानून के अभाव में देश में वर्किंग जर्नलिस्ट असुरक्षित हैं। प्रस्ताव में पत्रकारों के गोपनीय स्रोतों को कानूनी संरक्षण देने की भी मांग की गई।
श्रम कानूनों की बहाली और सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने की मांग की गई
संघ ने वर्ष 1955 और 1958 के वर्किंग जर्नलिस्ट कानूनों के देश में निरस्त होने के बाद पत्रकारों की नौकरी की सुरक्षा, वेतन संरक्षण और बेहतर कार्य परिस्थितियों के लिए व्यापक कानून की मांग की। इसके साथ ही केंद्र सरकार से अपील की गई कि देश के मीडिया संस्थानों में सभी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष की जाए।

आगामी कार्यक्रम और अभियान जो तय किए गए
बैठक में महासचिव डी. सोमसुंदर ने पिछले चार महीनों की रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें छत्तीसगढ़ से राज्य सचिव सुधीर आज़ाद तंबोली, महिला प्रतिनिधि स्वाति कौशिक सहित लगभग 15 राज्यों के 90 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। आईजेयू ने बैठक में निम्नलिखित प्रमुख निर्णयों का ऐलान किया:-
2 अक्टूबर (पत्रकार मांग दिवस) के रूप में देश भर के अपनी लंबित मांगों के समाधान के लिए देश भर के पत्रकार ‘पत्रकार मांग दिवस’ मनाएंगे।
16 नवंबर (राष्ट्रीय प्रेस दिवस) पर एक मजबूत ‘ राष्ट्रीय मीडिया काउंसिल’ की आवश्यकता को रेखांकित करने के लिए देशव्यापी अभियान शुरू किया जाएगा, जिसके तहत गोलमेज बैठकों और सेमिनार आयोजित होंगे।
इसी क्रम में अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में हैदराबाद में महिला पत्रकारों का एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।





