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‘ऑपरेशन सिपाही रक्षा-सूत्र 0.4’: सरहद के प्रहरियों के लिए छत्तीसगढ़ से भेजी गईं रिकॉर्ड 21 लाख राखियां, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की भावुक अपील पर उमड़ा प्रदेशव्यापी जनसैलाब

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० महिला एवं बाल विकास विभाग के मैदानी अमले और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सामूहिक सहयोग से बना ऐतिहासिक कीर्तिमान

० अंबिकापुर में आयोजित गरिमामय कार्यक्रम में शामिल हुईं मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े; पूर्व सैनिक महासभा को सौंपी गईं राखियां

० राखी के साथ आंगन की पवित्र मिट्टी और शुभकामना पत्र लेकर जशपुर होते हुए सेना मुख्यालय नई दिल्ली पहुंचेगी रक्षा-सूत्र यात्रा

रायपुर।देश की सीमाओं पर तैनात वीर जवानों के शौर्य और त्याग के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के उद्देश्य से संचालित ‘ऑपरेशन सिपाही रक्षा-सूत्र अभियान 2026’ (संस्करण 0.4) ने इस वर्ष ऐतिहासिक सफलता हासिल की है।

छत्तीसगढ़ की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े की प्रदेशव्यापी मार्मिक अपील और प्रेरणा से इस वर्ष प्रदेशभर से रिकॉर्ड 21 लाख राखियां एकत्र की गई हैं। यह पावन रक्षा-सूत्र, शुभकामना पत्र और छत्तीसगढ़ के आंगनों की पवित्र मिट्टी पूर्व सैनिक महासभा के माध्यम से देश की विभिन्न सीमाओं पर तैनात सैनिकों तक पहुंचाई जाएगी।

अंबिकापुर में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने पूर्व सैनिकों को सौंपा रक्षा-सूत्रों का संग्रह
संभाग मुख्यालय अंबिकापुर में आयोजित ‘ऑपरेशन सिपाही रक्षा-सूत्र 0.4’ के भव्य कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं।

इस दौरान अंबिकापुर व सरगुजा संभाग से एकत्र किए गए विशाल रक्षा-सूत्र संग्रह को पूर्व सैनिक महासभा के पदाधिकारियों को विधिवत सौंपा गया। यह रक्षा-सूत्र यात्रा अंबिकापुर से आगे बढ़ते हुए जशपुर पहुंचेगी और वहां से प्रदेश के अन्य पड़ावों को पूरा करते हुए नई दिल्ली स्थित सेना मुख्यालय के लिए रवाना होगी।

मंत्री जी की अपील पर महिला एवं बाल विकास विभाग का मैदानी अमला बना अभियान की रीढ़
अभियान की शुरुआत में मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने एक विशेष वीडियो संदेश जारी कर प्रदेश की माताओं, बहनों और बच्चों से सैनिकों के लिए हस्तनिर्मित राखी, शुभकामना संदेश और आंगन की पवित्र मिट्टी भेजने का आत्मीय आग्रह किया था।

मंत्री जी के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग ने पूरे प्रदेश में सक्रिय भूमिका निभाई। विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO), परियोजना अधिकारी (CDPO), सुपरवाइजर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका बहनों ने न केवल स्वयं राखियां तैयार कीं, बल्कि गांव-गांव और वार्ड स्तर पर जन-जन से राखियां एकत्र करने में प्रमुख समन्वयकारी भूमिका निभाई।

विभिन्न सामाजिक संगठनों की सहभागिता से बना सर्वकालिक रिकॉर्ड
महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ-साथ प्रदेश के विभिन्न सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों, महिला स्व-सहायता समूहों और आम नागरिकों ने बढ़-चढ़कर अपना योगदान दिया।

सभी के सामूहिक प्रयास और जनभागीदारी का ही परिणाम है कि वर्ष 2023 से शुरू हुए इस पुनीत अभियान ने इस वर्ष अपने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए:
* वर्ष 2023: 6,71,000 राखियां
* वर्ष 2024: 9,00,000 राखियां
* वर्ष 2025: 12,21,000 राखियां
* वर्ष 2026: 21,00,000 राखियां (ऐतिहासिक कीर्तिमान)

सरहद के जवानों के प्रति छत्तीसगढ़ का अटूट विश्वास: श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े
अंबिकापुर में सभा को संबोधित करते हुए मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि शून्य से नीचे तापमान और दुर्गम सीमाओं पर तैनात हमारे फौजी भाई हैं, तभी हम अपने घरों में स्वतंत्रता और शांति से हर पर्व मना पाते हैं। छत्तीसगढ़ की बहनों द्वारा भेजी जा रही 21 लाख राखियां केवल रेशम का धागा नहीं, बल्कि हर सैनिक के माथे पर विजय तिलक और पूरे प्रदेश का रक्षा-कवच हैं। लिफाफे में भेजी गई आंगन की पवित्र मिट्टी जवानों को यह अहसास कराएगी कि मातृभूमि का कण-कण उनके साथ है। मंत्री जी ने पूर्व सैनिक महासभा, विभागीय अमले और सहयोग देने वाले सभी सामाजिक संगठनों के प्रति आभार व्यक्त किया।