मेट्स यूनिवर्सिटी में ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश, विदेशी छात्रों ने पहने छत्तीसगढ़ी कोसा के परिधान; रैंप वॉक से दिया स्वदेशी का संदेश

रायपुर। मेट्स यूनिवर्सिटी, रायपुर में 17 सितंबर को ‘आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़- वोकल फॉर लोकल, सेल्फी विद स्वदेशी’ सोशल अवेयरनेस कैंपेन का आयोजन किया गया। अभियान में 40 से अधिक छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। खास बात यह रही कि विदेशी विद्यार्थियों ने भी छत्तीसगढ़ के कोसा एवं कॉटन से तैयार परिधान पहनकर रैंप वॉक किया और स्वदेशी हथकरघा उत्पादों को अपनाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में मेट्स यूनिवर्सिटी के करीब 400 से अधिक विद्यार्थी और फैकल्टी सदस्य शामिल हुए। बिलासा हैंडलूम के डिजाइनरों द्वारा तैयार हाथकरघा कोसा एवं कॉटन वस्त्रों के परिधानों में विद्यार्थियों ने रैंप वॉक कर ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को समर्थन दिया।
बुनकरों के उत्पादों को अपनाने की अपील
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा संघ के अध्यक्ष भोजराम देवांगन ने प्रदेश के कोसा और कॉटन क्षेत्र के बुनकरों द्वारा तैयार हाथकरघा वस्त्रों को अधिक से अधिक अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि हाथकरघा से बने वस्त्र स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हैं और इनके इस्तेमाल से स्थानीय बुनकरों को सीधे लाभ मिलता है।
3.50 लाख से अधिक बुनकरों-शिल्पियों को मिल रहा रोजगार
ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा (आईएएस) ने बताया कि हाथकरघा, रेशम, हस्तशिल्प, माटीकला और खादी ग्रामोद्योग के माध्यम से प्रदेश के 3.50 लाख से अधिक बुनकरों और शिल्पियों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि बिलासा हैंडलूम एम्पोरियम में उत्पादों के वैल्यू एडिशन और बाजार की मांग के अनुरूप डिजाइनर वस्त्र विकसित करने के लिए निफ्ट डिजाइनर तथा विपणन विकास के लिए मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव की नियुक्ति की गई है।
सोशल मीडिया के जरिए ‘सेल्फी विद स्वदेशी’ अभियान
राजेश सिंह राणा ने बताया कि नई पीढ़ी और विशेष रूप से Gen-Z को स्वदेशी उत्पादों के इस्तेमाल के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से ग्रामोद्योग विभाग के इंस्टाग्राम पर QR कोड उपलब्ध कराया गया है।
इसके तहत 1 अगस्त 2026 से छत्तीसगढ़ के हाथकरघा, हस्तशिल्प, माटीकला और खादी उत्पादों के साथ सेल्फी या फोटो अपलोड करने तथा ग्रामोद्योग उत्पादों की खरीदारी करने वाले प्रतिभागियों में से हर माह 10 चयनित ग्राहकों/प्रतिभागियों को पुरस्कार और उपहार दिए जाने की व्यवस्था की गई है।
इस अभियान का उद्देश्य स्वदेशी उत्पादों का प्रचार-प्रसार बढ़ाने के साथ-साथ इनके बाजार को मजबूत करना और प्रदेश के बुनकरों एवं शिल्पियों को आर्थिक रूप से लाभ पहुंचाना है।
स्वदेशी फैशन शो को भी मिली थी सराहना
सचिव राजेश सिंह राणा ने बताया कि 7 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में स्वदेशी फैशन शो का आयोजन किया गया था। इसमें सुकमा जिले की 10 आत्मसमर्पित एवं पुनर्वासित महिलाओं ने हिस्सा लिया था, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली।
उन्होंने कहा कि हाथकरघा वस्त्रों की खरीदारी से बुनकरों के रोजगार को बढ़ावा मिलता है और यह स्थानीय आर्थिक विकास में भी सहायक है।
कार्यक्रम में मेट्स यूनिवर्सिटी के महानिदेशक प्रियेश पगारिया, संचालक के.पी. यादव सहित ग्रामोद्योग विभाग के अधिकारी एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।





