यूपी एमएलसी चुनाव में बीजेपी को झटका! मोदी के गढ़ वाराणसी की दोनों सीटों पर सपा का कब्जा, 2027 से पहले क्या हैं सियासी मायने?

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद की 11 सीटों के नतीजों ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। चुनाव में बीजेपी ने छह सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) के खाते में पांच सीटें आईं। सीटों के लिहाज से बीजेपी भले ही आगे रही, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की दोनों सीटों पर सपा की जीत और राजधानी लखनऊ की स्नातक सीट बीजेपी के हाथ से निकलना चर्चा का विषय बन गया है। पिछले चुनाव में तीन सीटें जीतने वाली सपा ने इस बार अपना आंकड़ा बढ़ाकर पांच कर लिया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ये नतीजे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की सियासत में बदलते राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा कर रहे हैं?
चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सपा का खाता वहां भी खुल गया, जहां नहीं खुलना चाहिए था। उन्होंने स्वीकार किया कि बीजेपी को उम्मीद थी कि वह पिछली बार से ज्यादा सीटें जीतेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मौर्य ने कहा कि पार्टी चुनाव परिणामों की समीक्षा करेगी और 2027 के विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन का प्रयास करेगी। दूसरी तरफ, सपा समर्थकों के बीच ‘अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज तो झांकी है, पूरा यूपी बाकी है’ का नारा भी चर्चा में है।
किस पार्टी ने कितनी सीटों पर दर्ज की जीत?
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों में पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें शामिल थीं। इनमें लखनऊ, आगरा, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद, गोरखपुर-फैजाबाद, इलाहाबाद-झांसी और वाराणसी निर्वाचन क्षेत्र प्रमुख रहे।
2020 के चुनाव में बीजेपी ने छह, समाजवादी पार्टी ने तीन और निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस बार बीजेपी ने छह सीटों पर जीत हासिल की, जबकि सपा ने अपनी सीटों की संख्या तीन से बढ़ाकर पांच कर ली।
सपा के खाते में आईं पांच सीटें
- लखनऊ स्नातक
- आगरा-अलीगढ़ शिक्षक
- वाराणसी स्नातक
- वाराणसी शिक्षक
- इलाहाबाद-झांसी स्नातक
बीजेपी ने जीतीं छह सीटें
- लखनऊ शिक्षक
- आगरा स्नातक
- मेरठ स्नातक
- मेरठ शिक्षक
- बरेली-मुरादाबाद शिक्षक
- गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक
प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में दोनों सीटों पर सपा की जीत
इन चुनावों में सबसे ज्यादा चर्चा वाराणसी की दोनों सीटों पर सपा की जीत को लेकर हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में शिक्षक और स्नातक दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में सपा ने जीत दर्ज की है।
वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा के लाल बिहारी यादव ने बीजेपी के डॉ. प्रमोद मिश्रा को हराया। लाल बिहारी यादव को 11,612 वोट मिले। उन्होंने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। वह इससे पहले उत्तर प्रदेश विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं।
वहीं, वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सपा के आशुतोष सिन्हा ने बीजेपी के केदारनाथ सिंह को शिकस्त दी। यह सीट भी पहले सपा के पास थी। मतगणना के दौरान बीजेपी की ओर से आपत्तियां उठाई गईं और पुनर्गणना की मांग की गई। हंगामे के बीच मतगणना कुछ समय के लिए प्रभावित हुई, लेकिन आशुतोष सिन्हा अपनी बढ़त बनाए रखने में सफल रहे।
आगरा सीट पर सपा की जीत क्यों है अहम?
आगरा-अलीगढ़ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा के डॉ. आकाश अग्रवाल ने बीजेपी के हरि किशोर तिवारी को 4,263 वोटों से हराया। आकाश अग्रवाल को 14,046 वोट मिले, जबकि बीजेपी उम्मीदवार को 9,783 वोट हासिल हुए।
इस जीत की खास बात यह है कि 2020 में डॉ. आकाश अग्रवाल ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर जीत दर्ज की थी। इस बार वह सपा के टिकट पर मैदान में उतरे और अपनी सीट बरकरार रखने में सफल रहे।
मतदान के दौरान आगरा में बूथ कैप्चरिंग और अनियमितताओं की शिकायतें भी सामने आई थीं। आकाश अग्रवाल ने प्रशासन पर पक्षपात के आरोप लगाए थे। कुछ बूथों पर दोबारा मतदान भी कराया गया था। इन शिकायतों और पुनर्मतदान के कारण यह सीट चुनाव के दौरान चर्चा में रही।
लखनऊ में बीजेपी की स्नातक सीट सपा ने छीनी
राजधानी लखनऊ में बीजेपी को बड़ा झटका लगा। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट पर सपा की कांति सिंह ने बीजेपी के मौजूदा एमएलसी अवनीश कुमार सिंह को 17,127 वोटों से हराया। कांति सिंह को 56,905 वोट मिले, जबकि अवनीश कुमार सिंह को 39,778 वोट हासिल हुए।
कांति सिंह 2014 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीतकर विधान परिषद पहुंची थीं। 2020 के चुनाव में बीजेपी के अवनीश कुमार सिंह ने उन्हें हराकर यह सीट अपने नाम कर ली थी। इस बार सपा के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए कांति सिंह ने छह साल बाद फिर इस सीट पर वापसी की।
हालांकि, लखनऊ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी ने अपनी सीट बरकरार रखी। यहां पार्टी के उमेश द्विवेदी ने जीत की हैट्रिक लगाई। उन्हें 13,179 वोट मिले, जबकि सपा के सुशील कुमार को 8,371 वोट हासिल हुए। इस तरह लखनऊ की दोनों सीटों पर अलग-अलग दलों ने जीत दर्ज की।
गोरखपुर में बीजेपी की जीत, लेकिन महज 307 वोटों का अंतर
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी के ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने जीत दर्ज की, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव ने उन्हें कड़ी टक्कर दी। ध्रुव त्रिपाठी महज 307 वोटों से चुनाव जीत सके, जबकि सपा के उम्मीदवार डॉ. संजयन त्रिपाठी तीसरे स्थान पर रहे।
खास बात यह है कि ध्रुव त्रिपाठी इससे पहले तीन बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीत चुके थे। इस बार वह बीजेपी के टिकट पर मैदान में उतरे थे। वहीं, निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव दूसरे स्थान पर रहे।
मतगणना के बाद राजीव यादव ने वोटों की गिनती में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए अदालत जाने की बात कही। सपा उम्मीदवार ने भी मतगणना पर सवाल उठाए। इस सीट पर बेहद करीबी मुकाबला चुनाव परिणामों की एक अहम चर्चा बना रहा।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले क्या हैं इन नतीजों के मायने?
विधान परिषद चुनाव के परिणामों को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सपा ने अपनी सीटों की संख्या बढ़ाकर पांच कर ली है। वाराणसी की दोनों सीटों पर जीत और लखनऊ की स्नातक सीट पर वापसी ने पार्टी को राजनीतिक चर्चा में ला दिया है।
दूसरी ओर, बीजेपी ने छह सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी पिछली सीट संख्या बरकरार रखी है। हालांकि, वाराणसी में दोनों सीटें गंवाना और लखनऊ की स्नातक सीट पर हार पार्टी के लिए समीक्षा का विषय है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का परिणामों की समीक्षा की बात कहना भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
लेकिन इन नतीजों को विधानसभा चुनाव का सीधा संकेत मानना जल्दबाजी होगी। विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों के मतदाता सामान्य विधानसभा चुनाव के मतदाताओं से अलग होते हैं। इन चुनावों में स्थानीय उम्मीदवार, शिक्षक संगठनों की भूमिका, मतदाता संपर्क और क्षेत्रीय मुद्दे भी परिणामों को प्रभावित करते हैं।
फिलहाल इन नतीजों ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और सपा के बीच राजनीतिक रणनीति, संगठनात्मक मजबूती और मतदाता संपर्क को लेकर नई बहस जरूर शुरू कर दी है। अब दोनों दलों की नजर आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर होगी।




