महिला आरक्षण कानून लागू, 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित; पीएम मोदी बोले—नारी शक्ति ही मजबूत भारत की पहचान

दिल्ली। देश में लंबे इंतजार के बाद महिला आरक्षण कानून 2023 अब लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके बाद यह कानून 16 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गया है। इस महत्वपूर्ण कदम को महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक माना जा रहा है।
इस कानून के लागू होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की नारी शक्ति की सराहना की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ‘सुभाषितम’ श्रृंखला के तहत लिखा कि भारत की माताएं, बहनें और बेटियां अपनी संकल्पशक्ति, निष्ठा और सेवाभाव से देश का गौरव बढ़ा रही हैं। उन्होंने नारी शक्ति को सशक्त भारत की पहचान बताया और संस्कृत के श्लोकों के माध्यम से भी अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।
क्या है कानून की मुख्य बातें
महिला आरक्षण कानून, जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम से जाना जाता है, के तहत:
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित होंगी
संसद ने इसे सितंबर 2023 में पारित किया था
इसका उद्देश्य राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है
तुरंत लागू क्यों नहीं होगा आरक्षण
हालांकि कानून लागू हो गया है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ 2029 से पहले मिलने की संभावना नहीं है। इसका कारण यह है कि आरक्षण को 2027 की जनगणना और उसके बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। यानी नई सीटों के निर्धारण के बाद ही यह व्यवस्था लागू हो सकेगी।
संसद में चल रही चर्चा
फिलहाल संसद में इससे जुड़े तीन अहम विधेयकों पर चर्चा जारी है। इनमें लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव भी शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी ने भरोसा दिलाया है कि परिसीमन के दौरान किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा और इसे उन्होंने “मोदी की गारंटी” बताया।
वहीं, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि दक्षिण भारत के राज्यों की सीटें कम नहीं होंगी, बल्कि बढ़ेंगी। उदाहरण के तौर पर, दक्षिण भारत की कुल सीटें 129 से बढ़कर 195 तक पहुंच सकती हैं, जबकि तमिलनाडु की सीटों में भी उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना जताई गई है।
यह कानून भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को नई दिशा देने वाला अहम कदम माना जा रहा है।





