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स्कूल यूनिफॉर्म की गुणवत्ता से नहीं होगा समझौता, 100% परीक्षण के निर्देश जारी

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० मुख्यमंत्री के निर्देश पर ग्रामोद्योग विभाग सख्त, अब हर तैयार यूनिफॉर्म की होगी जांच

रायपुर। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में वितरित किए जाने वाले यूनिफॉर्म की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ग्रामोद्योग विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव के मार्गदर्शन में विभाग के सचिव एवं प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा (आईएएस) ने गोदाम स्तर पर स्कूल यूनिफॉर्म के शत-प्रतिशत गुणवत्ता परीक्षण के निर्देश जारी किए हैं।

अब तक गोदाम प्रभारी और तकनीकी कर्मचारियों द्वारा रेडीमेड गणवेश, ग्रे धागे और वस्त्रों सहित प्रोसेस एवं प्रिंटिंग सामग्री की केवल रेंडम जांच की जाती थी। नए निर्देशों के तहत अब रेडीमेड स्कूल यूनिफॉर्म की 100 प्रतिशत तकनीकी जांच अनिवार्य होगी, जबकि ग्रे धागा, वस्त्र तथा प्रोसेस एवं प्रिंटिंग सामग्री की 50 प्रतिशत तकनीकी जांच सुनिश्चित की जाएगी।

विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण यूनिफॉर्म उपलब्ध हो और गुणवत्ता संबंधी किसी भी प्रकार की शिकायत की गुंजाइश न रहे।

गौरतलब है कि स्कूल शिक्षा विभाग की मांग के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा बुनकर संघ हर वर्ष प्रदेश के सभी जिलों के संकुल स्तर तक रेडीमेड स्कूल यूनिफॉर्म की आपूर्ति करता है। इसके लिए प्रदेश की 337 बुनकर सहकारी समितियों से जुड़े करीब 60 हजार बुनकर ग्रे कपड़े का उत्पादन करते हैं, जबकि 2004 महिला स्व-सहायता समूह यूनिफॉर्म की सिलाई का कार्य करते हैं।

इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से प्रदेश में 90 हजार से अधिक बुनकरों और महिलाओं को निरंतर रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। विभाग का मानना है कि नई गुणवत्ता जांच व्यवस्था से विद्यार्थियों को बेहतर यूनिफॉर्म मिलने के साथ-साथ हाथकरघा और महिला स्व-सहायता समूहों के उत्पादों की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।