38 करोड़ का हरदीडीह एनीकट समय से पहले जर्जर, निर्माण गुणवत्ता और निगरानी पर उठे गंभीर सवाल

० 180 मीटर से अधिक हिस्सा बहा, जांच समिति गठित; स्थानीय लोगों ने निर्माण और रखरखाव में लापरवाही का लगाया आरोप
रायपुर। महानदी पर करीब 38 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2012-13 में निर्मित हरदीडीह एनीकट अपनी निर्धारित आयु पूरी होने से पहले ही गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया है। एनीकट का 180 मीटर से अधिक हिस्सा बह चुका है, जबकि शेष संरचना भी कमजोर बताई जा रही है। इस घटना के बाद निर्माण गुणवत्ता, रखरखाव और विभागीय निगरानी को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
निर्माण गुणवत्ता पर स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि एनीकट के निर्माण के दौरान गुणवत्ता मानकों का पर्याप्त पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि वर्षों से कटाव की समस्या बनी हुई थी, लेकिन संबंधित विभाग ने समय रहते प्रभावी मरम्मत या सुरक्षा उपाय नहीं किए। मेंटेनेंस पर बजट खर्च होने के बावजूद संरचना की स्थिति लगातार खराब होती चली गई।
गेट संचालन में भी लापरवाही का आरोप
ग्रामीणों ने एनीकट के गेट संचालन को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि समय पर और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार गेटों का संचालन नहीं होने से संरचना पर अतिरिक्त दबाव पड़ा, जिससे नुकसान और बढ़ गया।
जांच समिति का गठन, जिम्मेदारी तय करने की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए मई 2026 में जांच समिति का गठन किया गया है। जांच में निर्माण कार्य, रखरखाव, तकनीकी खामियों और विभागीय जिम्मेदारियों की पड़ताल की जाएगी।
स्वतंत्र तकनीकी जांच और वित्तीय ऑडिट की मांग
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच और वित्तीय ऑडिट कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्माण, रखरखाव या निगरानी में कहां चूक हुई और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
अधिकारियों ने विस्तृत टिप्पणी से किया परहेज
मामले में जिन अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, उन्होंने इसे पुराना मामला बताते हुए विस्तृत टिप्पणी करने से परहेज किया है। फिलहाल सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे एनीकट के समय से पहले क्षतिग्रस्त होने के वास्तविक कारण सामने आने की उम्मीद है।





