BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के लंबे कार्यकाल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, 2030 तक बढ़ाने वाली अधिसूचना रद्द करने की मांग

नई दिल्ली। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के लंबे कार्यकाल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। अधिवक्ता योगमाया एमजी की ओर से दाखिल याचिका में BCI नियमों के तहत चेयरमैन के दो साल के कार्यकाल का हवाला देते हुए 21 अप्रैल 2025 की गजट अधिसूचना को रद्द करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि इसी अधिसूचना के जरिए मनन कुमार मिश्रा का कार्यकाल 2030 तक बढ़ाया गया।
चेयरमैन को पद से हटाने और नए चुनाव की मांग
याचिका में मनन कुमार मिश्रा को BCI चेयरमैन पद से हटाने और स्वतंत्र निगरानी में नए चुनाव कराने की मांग की गई है। साथ ही चेयरमैन के कुल कार्यकाल की अधिकतम सीमा तय करने, राज्यों और क्षेत्रों के बीच रोटेशन व्यवस्था लागू करने तथा कूलिंग-ऑफ अवधि निर्धारित करने का भी आग्रह किया गया है।
याचिकाकर्ता ने BCI नियमों के नियम 12(2) का हवाला देते हुए कहा है कि चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन का कार्यकाल दो साल निर्धारित है। याचिका के मुताबिक, प्रशासनिक अधिसूचना के जरिए वैधानिक नियमों में तय अवधि से आगे कार्यकाल नहीं बढ़ाया जा सकता।
करीब 12 साल से एक ही व्यक्ति के पास पद रहने पर सवाल
याचिका में दावा किया गया है कि मनन कुमार मिश्रा लंबे समय से BCI के शीर्ष पद पर बने हुए हैं। याचिका के अनुसार, वह 2012 से चेयरमैन पद से जुड़े रहे हैं, 2014 में कुछ समय के लिए पद छोड़ने के बाद उसी वर्ष नवंबर में दोबारा चेयरमैन बने और मार्च 2025 में एक बार फिर निर्विरोध चुने गए। याचिकाकर्ता के अनुसार, यह उनका लगातार सातवां कार्यकाल है।
PIL में कहा गया है कि लंबे समय तक एक ही व्यक्ति के हाथ में संस्था का शीर्ष पद बने रहने से BCI की प्रतिनिधिक व्यवस्था और संस्थागत संतुलन पर सवाल उठते हैं।
BCI के वित्तीय मामलों की स्वतंत्र जांच की मांग
याचिका में BCI के वित्तीय मामलों की स्वतंत्र जांच और ऑडिट कराने की भी मांग की गई है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश या किसी हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
याचिकाकर्ता ने समिति की सहायता के लिए CAG द्वारा नामित ऑडिटर के साथ वित्तीय और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग की है।
BCI ट्रस्ट और AIBE की आय की जांच की मांग
याचिका में BCI ट्रस्ट ‘PEARL-FIRST’ के कामकाज और वित्तीय मामलों के अलावा ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) से जुड़े वित्तीय मामलों की भी स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
इसके तहत वैधानिक फंड, AIBE से होने वाली आय, संस्थागत प्राप्तियों, ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन, वेंडर कॉन्ट्रैक्ट और संबंधित पक्षों के लेनदेन का तय समय सीमा में ऑडिट कराने की मांग की गई है।
राजनीतिक जुड़ाव को लेकर भी उठाए सवाल
याचिका में मनन कुमार मिश्रा के राजनीतिक जुड़ाव का भी उल्लेख किया गया है। इसमें 2024 में BJP द्वारा नामित किए जाने के बाद उनके राज्यसभा सदस्य बनने का जिक्र है।
याचिकाकर्ता ने कहा है कि केवल राजनीतिक संबद्धता के आधार पर उन्हें पद के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जा रहा है, लेकिन एक राजनीतिक पद से जुड़े व्यक्ति के देश की कानूनी पेशे को नियंत्रित करने वाली वैधानिक संस्था के प्रमुख होने से BCI की संस्थागत निष्पक्षता और स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठते हैं।
याचिका में स्पष्ट किया गया है कि चुनौती किसी व्यक्ति के प्रति व्यक्तिगत असहमति पर आधारित नहीं है, बल्कि कथित संरचनात्मक अवैधता, कार्यकाल से जुड़े वैधानिक प्रावधानों, संस्थागत पारदर्शिता, जवाबदेही और BCI में शक्तियों के केंद्रीकरण से जुड़े मुद्दों पर आधारित है।




