CG Tiger Alert: औंधी में फिर दिखा बाघ, पगमार्क मिलते ही बढ़ी दहशत; बच्चों ने छोड़ा स्कूल, दिन-रात गश्त कर रहा वन अमला

मोहला-मानपुर। महाराष्ट्र और बस्तर की सीमा से लगे औंधी इलाके में बाघ की मौजूदगी ने एक बार फिर ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले करीब एक सप्ताह से गट्टेपायली और घोटियाकन्हार सहित आसपास के इलाकों में अलग-अलग समय पर ग्रामीणों ने बाघ को देखने का दावा किया है। गट्टेपायली गांव के पास मुख्य सड़क किनारे बाघ के पगमार्क मिलने के बाद वन विभाग अलर्ट मोड पर है। संभावित विचरण क्षेत्र में ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं और दिन-रात गश्त बढ़ा दी गई है।
खेत से स्कूल तक पहुंचा बाघ का डर
बाघ की मौजूदगी का असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ नजर आ रहा है। खेती-किसानी के मौसम में किसान डर के बीच खेतों का रुख कर रहे हैं। ग्रामीणों को हर समय जंगल या खेत के आसपास बाघ के सामने आने की आशंका बनी हुई है।
सबसे ज्यादा चिंता बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। बाघडोंगरी माध्यमिक शाला में आसपास के गांवों से आने वाले कई बच्चे पिछले कुछ दिनों से स्कूल नहीं पहुंचे हैं। अभिभावक बच्चों को अकेले स्कूल भेजने से डर रहे हैं।
स्कूल पहुंचकर वन विभाग ने की शिक्षकों से चर्चा
वन विभाग की टीम ने बाघडोंगरी माध्यमिक शाला पहुंचकर शिक्षकों से बच्चों की सुरक्षा को लेकर चर्चा की। रेंजर प्रवीण देहारी ने शिक्षकों से कहा कि वे बच्चों के पालकों से बातचीत कर स्कूल आने-जाने के लिए सुरक्षित व्यवस्था बनाने का प्रयास करें। वन विभाग की ओर से भी इसमें सहयोग का भरोसा दिया गया है।
दिन-रात गांवों में गश्त, ट्रैप कैमरों से निगरानी
वन परिक्षेत्र अधिकारी प्रवीण देहारी के नेतृत्व में वन अमला लगातार क्षेत्र में गश्त कर रहा है। टीम दिन के साथ देर रात तक महाराष्ट्र सीमा से लगे गांवों में पहुंच रही है और ग्रामीणों को सतर्क कर रही है।
बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए संभावित विचरण वाले इलाकों में ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। कैमरों के जरिए बाघ की लोकेशन और उसकी गतिविधियों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
अकेले खेत-जंगल न जाएं, समूह में निकलें
घोटियाकन्हार और गट्टेपायली में ग्रामीणों के साथ बैठक कर वन विभाग ने उन्हें बाघ से बचाव के उपाय बताए हैं। ग्रामीणों से अकेले खेत या जंगल की ओर जाने से बचने और संभव हो तो समूह में जाने की अपील की गई है।
वन विभाग ने कहा है कि बाघ दिखाई देने पर उसके करीब जाने या उसे घेरने की कोशिश न करें। तत्काल वन अमले को सूचना दें।
‘बाघ जंगल में ही है, ग्रामीण रहें सतर्क’
रेंजर प्रवीण देहारी ने क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि करते हुए कहा कि बाघ अपने प्राकृतिक आवास जंगल में ही है। क्षेत्र जंगल से घिरा होने के कारण कभी-कभी बाघ ग्रामीण इलाकों की ओर आ सकता है।
उन्होंने बताया कि वन विभाग की टीम पूरी मुस्तैदी से स्थिति पर नजर रख रही है और संभावित विचरण क्षेत्रों में ट्रैप कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है। ग्रामीणों से भी विभाग का सहयोग करने और अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की गई है।
महाराष्ट्र में दो ग्रामीणों की हो चुकी है मौत
औंधी और आसपास का इलाका पिछले करीब दो वर्षों से बाघ की आवाजाही से प्रभावित रहा है। महाराष्ट्र सीमा के उस पार हाल ही में दोलेंदा गांव में बाघ के हमले में एक ग्रामीण की मौत हुई थी। इससे करीब 7-8 महीने पहले महाराष्ट्र के मुरुमगांव क्षेत्र में भी बाघ के हमले में एक ग्रामीण की जान गई थी।
वहीं औंधी और सीतागांव क्षेत्र के निडेली, बागडोंगरी और पिट्टेमेटा समेत कई गांवों में पिछले दो वर्षों के दौरान बाघ द्वारा पालतू मवेशियों का शिकार किए जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
पुरानी घटनाओं के कारण अब दोबारा बाघ की मौजूदगी से ग्रामीणों में किसी अप्रिय घटना को लेकर डर बना हुआ है। फिलहाल वन विभाग की निगरानी और गश्त लगातार जारी है।





