Kartik Month 2026: 26 अक्टूबर से शुरू होगा कार्तिक मास, जानें दीपदान से लेकर खानपान तक के जरूरी नियम

Kartik Maas 2026: हिंदू धर्म में कार्तिक महीने का विशेष महत्व है। इस दौरान भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा, स्नान, दान और दीपदान करना शुभ माना जाता है। जानिए कार्तिक मास कब से शुरू होगा, कब समाप्त होगा और इस दौरान किन नियमों का पालन करना चाहिए।
धार्मिक डेस्क। हिंदू धर्म में कार्तिक मास को बेहद पवित्र माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। कार्तिक मास में स्नान-दान, तुलसी पूजन और दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस महीने में नियमित रूप से पूजा-पाठ और सात्विक जीवनशैली अपनाने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
पंचांग के अनुसार, आश्विन मास की पूर्णिमा के बाद कार्तिक मास का आरंभ होता है। इस दौरान कुछ धार्मिक कार्यों को विशेष फलदायी माना जाता है, जबकि कुछ चीजों से परहेज करने की परंपरा है। आइए, पंडित राकेश झा के अनुसार जानते हैं कार्तिक मास 2026 की शुरुआत और इस महीने में पालन किए जाने वाले प्रमुख नियम।
कब से शुरू होगा कार्तिक मास 2026?
दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, आश्विन पूर्णिमा तिथि 26 अक्टूबर 2026, सोमवार को सुबह 9 बजकर 42 मिनट तक रहेगी। इसके बाद कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा तिथि शुरू होगी, जो 27 अक्टूबर, मंगलवार को सुबह 7 बजकर 2 मिनट तक रहेगी।
उदयातिथि की गणना के अनुसार, कार्तिक मास के व्रत और मेले की शुरुआत 27 अक्टूबर से मानी गई है। वहीं, कार्तिक पूर्णिमा के दिन 24 नवंबर 2026 को इस महीने का समापन बताया गया है।
कार्तिक मास 2026 की प्रमुख तिथियां
- आश्विन पूर्णिमा समाप्त: 26 अक्टूबर, सोमवार, सुबह 9:42 बजे
- कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा आरंभ: 26 अक्टूबर, सोमवार, सुबह 9:42 बजे के बाद
- कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा समाप्त: 27 अक्टूबर, मंगलवार, सुबह 7:02 बजे
- कार्तिक मास के व्रत और मेले की शुरुआत: 27 अक्टूबर, मंगलवार
- कार्तिक मास का समापन: 24 नवंबर, मंगलवार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन
कार्तिक मास में क्या करना चाहिए?
1. शाम के समय करें दीपदान
कार्तिक मास में दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस महीने में शाम के समय घर के मुख्य द्वार, तुलसी के पौधे और पवित्र नदी या तालाब के किनारे दीपक जलाना शुभ माना जाता है। घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करने की परंपरा है।
2. तुलसी पूजन करना माना जाता है शुभ
कार्तिक मास में तुलसी पूजन का विशेष महत्व है। मान्यता है कि सुबह और शाम तुलसी के पास दीपक जलाकर पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। इस दौरान तुलसी की नियमित देखभाल और पूजा करने की परंपरा भी प्रचलित है।
3. सामर्थ्य के अनुसार करें दान
इस महीने में जरूरतमंदों को अन्न, चावल, गुड़, वस्त्र और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता करना कार्तिक मास के प्रमुख पुण्य कर्मों में शामिल है।
4. सात्विक जीवनशैली अपनाएं
कार्तिक मास में सात्विक भोजन, नियमित पूजा-पाठ और संयमित दिनचर्या अपनाने की परंपरा है। कुछ धार्मिक मान्यताओं में भूमि पर सोने का भी उल्लेख मिलता है। हालांकि, मौसम और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए आरामदायक बिस्तर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
5. नियमित करें भगवान विष्णु की पूजा
कार्तिक मास में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करना शुभ माना जाता है। इस दौरान विष्णु सहस्रनाम, श्रीहरि के मंत्रों और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करने की परंपरा है। श्रद्धालु अपनी आस्था और सामर्थ्य के अनुसार पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
कार्तिक मास में क्या नहीं करना चाहिए?
1. तामसिक भोजन से परहेज
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में मांसाहार और मदिरा से दूर रहने की सलाह दी जाती है। इस महीने में सात्विक भोजन करने और खानपान में संयम बरतने पर जोर दिया जाता है।
2. कुछ खाद्य पदार्थों से बचने की परंपरा
पंडित राकेश झा के अनुसार, कार्तिक मास में बैंगन, उड़द की दाल, मूंग की दाल, मटर, मछली, लहसुन और चना आदि के सेवन से परहेज करने की मान्यता है। हालांकि, इन नियमों का पालन अलग-अलग परंपराओं और परिवारों में अलग हो सकता है।
3. क्रोध और विवाद से बचें
कार्तिक मास में मन की शांति बनाए रखने, क्रोध पर नियंत्रण रखने और दूसरों के साथ विवाद से बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं में इस दौरान सकारात्मक विचारों, सदाचार और संयम को विशेष महत्व दिया गया है।
4. संयम और ब्रह्मचर्य का पालन
कुछ धार्मिक परंपराओं में कार्तिक मास के दौरान ब्रह्मचर्य और इंद्रिय संयम का पालन करने की सलाह दी जाती है। इसे आध्यात्मिक साधना और आत्म-अनुशासन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
5. तेल लगाने से जुड़ी मान्यता
कुछ परंपराओं में कार्तिक मास के दौरान शरीर पर तेल लगाने से परहेज करने की मान्यता है। हालांकि, कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी यानी नरक चतुर्दशी के दिन तेल लगाने की परंपरा भी प्रचलित है। स्वास्थ्य और मौसम की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए व्यक्तिगत देखभाल जारी रखना उचित है।
कार्तिक मास का क्या है धार्मिक महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास भगवान विष्णु की आराधना और पुण्य कर्मों के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान स्नान, दान, दीपदान, तुलसी पूजन और सात्विक जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया जाता है। श्रद्धालु पूरे महीने पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से आध्यात्मिक साधना करते हैं।
नोट: कार्तिक मास की शुरुआत और समाप्ति की तिथियां स्थानीय पंचांग तथा परंपरा के अनुसार अलग-अलग बताई जा सकती हैं। प्रकाशन से पहले 26 अक्टूबर से 24 नवंबर 2026 तक की तिथियों और वारों का संबंधित पंचांग से मिलान अवश्य कर लें।




